विधि विधान से पूरे जिले में हुई छठ पूजा, महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत

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विधि विधान से पूरे जिले में हुई छठ पूजा, महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत

अवधनामा संवाददाता

बाराबंकी। कबहूं न छूटी छठि मइया हमनी से बरत तोहार, छठी मइया आई न दुअरिया सजाएब पोखरी खनाए, केलवा, केशरवा चढ़ाईब छठि मइया गइया के दुधवा, हम सबका छमा करब छठ मईया भूल चूक गलती हमार। आज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पष्ठी तिथि को छठ महापर्व बड़ी ही आस्था व श्रद्धा भाव से मनाया गया। बुधवार को महापर्व के दिन महिलाओं ने 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा और छठी मइया व अस्तांचलगामी सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। मान्यता है कि छठ पूजा करने से छठी मइया भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करती है।

बताते चलें कि छठ पूजा में कार्तिक षष्ठी के दिन संध्या को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन शाम को सूर्य देव को अर्घ्य देकर उनका पूजन किया जाता है। इस दौरान प्रसाद और फल टोकरी और सूप में रखे जाते हैं। सभी व्रती ढलते सूरज को अर्घ्य देते हैं।  छठी मैया को ठेकुआ, मालपुआ, खीर-पूड़ी, खजूर, सूजी का हलवा, चावल का बना लड्डू, जिसे लडुआ भी कहते हैं आदि प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। छठी मैया की कथा सुनते हैं। छठी तिथि को शाम को अर्घ्य के बाद रात को सूर्य देवता का ध्यान और छठी मैया के गीत गाए जाते हैं। इसके बाद सुबह सप्तमी के दिन सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में सभी घाट पर पहुंचते हैं। सप्तमी तिथि को सुबह सूर्योदय से पहले नदी के घाट पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद व्रत का पारण करते हुए व्रत खोला जाता है। आज सांय काल जिले व शहर से सटे घाटों पर डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। बंकी क़स्बा के वासी एवं समाजसेवी रामनाथ मौर्य के अलावा बड़ी संख्या में लोग घाट पहुंचे। यहां महिलाओं ने विधि विधान से छठी माई व डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर मनोकामना पूर्ण होने का आशीष मांगा।

सिरौलीगौसपुर प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में छठ पूजा पर्व धूमधाम से मनाया गया। बुधवार की शाम डूबते सूर्य को अ‌र्घ्य देकर महिलाओं ने अपने पति व संतान की मंगल कामना के साथ घर की सुख समृद्धि कामना की।मंगलवार की सुबह उगते सूर्य को अ‌र्घ्य देकर उनकी उपासना की जाएगी। छठ पूजा पर्व दीपावली से छह दिन बाद शुरू होता है। बुधवार की शाम घाघरा नदी पर तेलवारी घाट सिसौडा घाट पर खड़े होकर डूबते सूर्य को अ‌र्घ्य दिया गया। श्रद्धालुओं ने फल, फूल, गन्ना, गुड़ व घी से बने ठेकुआ और चावल के आटे व गुड़ से बने भूसवा जैसे व्यंजनों के साथ पूजा-अर्चना की।