बच्चे को आंगनबाड़ी केंद्र लाएं, चुस्त-दुरुस्त व सेहतमंद बनाएं

जिले के 4172 आंगनबाड़ी केंद्रों का रोजाना होगा संचालन

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बच्चे को आंगनबाड़ी केंद्र लाएं,  चुस्त-दुरुस्त व सेहतमंद बनाएं

अवधनामा संवाददाता

गोरखपुर । तीन से छह साल तक के बच्चों को सेहतमंद और चुस्त-दुरुस्त  रखने की पूरी तैयारी है । जिले के कोविड मुक्त होने  के बाद  4172 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन  गुरूवार से फिर से शुरू हो गया है  । इन केंद्रों पर प्री-स्कूल किट, असेसमेंट कार्य के साथ-साथ शारीरिक गतिविधियों, साफ-सफाई और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी हेमंत सिंह ने अभिभावकों से अपील की है कि वह बच्चे को आंगनबाड़ी केंद्र अवश्य भेजें ।

श्री सिंह ने बताया कि जिले में करीब 1.70 लाख बच्चे आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत हैं । इन बच्चों को केंद्र आने पर पोषाहार दिया जाएगा और आगामी दिशा-निर्देशों के अनुसार हाटकुक्ड भी देने की योजना है । अभिभावकों से आग्रह है कि बच्चों को मॉस्क लगाकर ही केंद्र पर भेजें । इन केंद्रों पर 3650 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से बच्चों को भावगीत सिखाए जाएंगे । इन भावगीतों के जरिये बच्चों का मानसिक विकास होगा  । केंद्रों का संचालन कोविड-19 प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा ।

शहरी बाल विकास परियोजना अधिकारी प्रदीप कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि केंद्रो को सुबह 10 बजे से अपराह्न दो  बजे तक खोलने का दिशा-निर्देश है। केंद्रों पर आने वाले बच्चों कीहाथों की स्वच्छता और नाखून की सफाई देखी जाती है । अभिभावकों को बच्चों की साफ-सफाई के बारे में जानकारी दी जाती है । अभी तक सिर्फ सोमवार और गुरूवार को ही केंद्र खोलने की अनुमति थी लेकिन अब प्रत्येक कार्यदिवस पर केंद्र खोल कर संचालित किये जाएंगे ।

इस तरह बच्चों का रखा जाता है ख्याल :

• केंद्र पर आने वाले बच्चों का  वजन, लंबाई आदि की जांच कर उनके पोषण स्तर को देखा जाता है ।

• आवश्यकता पड़ने पर बच्चे को चिकित्सक को दिखा कर इलाज कराते हैं ।

• अगर बच्चा अति कुपोषित है तो उसे पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती करवाते हैं ।

• बच्चों को हल्का दौड़, गोला संबंधित खेल और अन्य शारीरिक गतिविधियां कराई जाती हैं ।

• बच्चे को पौष्टिक आहार मिलता है ।

ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल टीम की सुविधा भी

जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की मेडिकल टीम भी आती है । यह टीम बीमार बच्चों को चिन्हित कर उनका निःशुल्क इलाज करवाती है । कटे होंठ  व तालू , क्लब फुट जैसी बीमारियों की भी सर्जरी के जरिये इलाज की सुविधा मिलती है ।