अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय मे आयोजित समारोह में पंद्रह शिक्षकों को अयोध्या सांसद ने किया सम्मानित

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अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय मे आयोजित समारोह में पंद्रह शिक्षकों को अयोध्या सांसद ने किया सम्मानित 

अवधनामा संवाददाता 

अयोध्या। (Ayodhya) शिक्षक सृजन, संवर्धन तथा संहार तीनों का महत्वपूर्ण आधार है।राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विपरीत परिस्थितियों में जरूरत के समय राष्ट्र की अखंडता के लिए शिक्षकों ने कलम की जगह हथियार उठाने में भी संकोच नहीं किया है।यह उद्गार अंतर्राष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में शिक्षक अलंकरण समारोह में सांसद लल्लू सिंह ने व्यक्त किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री रामकुंज कथा मण्डप के पीठाधीश्वर डॉ. रामानन्द दास ने सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन के जीवन वृत्त पर प्रकाश डालते हुए उनके अवदान को आत्मसात करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिष्य के व्यक्तित्व विकास में सबसे बड़ी महत्ता गुरु के अनुग्रह की होती है। गुरु अपने शिष्य को शिक्षा देता है और शिष्य अध्ययन कर अच्छे अंको से उत्तीर्ण भी हो जाते हैं, किंतु यदि गुरु का अनुग्रह शिष्य के साथ नहीं है और यदि शिष्य को गुरू का हृदय से आशीर्वाद नहीं प्राप्त है तो उसे कभी सुख नहीं प्राप्त हो सकता , उसका जीवन मंगलमय नहीं होगा, उसे समाज में सम्मान नहीं प्राप्त होगा भले ही आर्थिक रुप से वह कितना भी संपन्न हो जाए। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि वशिष्ठ पीठाधीश्वर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा कि केवल शिक्षा ही नहीं अपितु अन्य क्षेत्रों में भी शिक्षकों ने अपनी भूमिका का पूरी जिम्मेदारी के साथ निर्वहन किया है। स्वाधीनता आंदोलन का इतिहास शिक्षकों की स्वर्णिम स्मृतियों भरा पड़ा है। गुरु वशिष्ठ से आचार्य चाणक्य तक गुरुओं की अद्भुत श्रृंखला भारतीय इतिहास से संबंधित है। जब भी कोई नवीन प्रवृत्ति,नई रचनात्मकता,नूतन बिधान,नयी विहान अथवा नई संस्कृति ने जन्म लिया है उसके पीछे किसी न किसी गुरु का ही आशीर्वाद रहा है। बिना गुरु के आशीर्वाद के कोई उल्लेखनीय सांस्कृतिक परिवर्तन धरती पर संभव नहीं हुआ है ।आजादी के अमृत महोत्सव पर आयोजित इस शिक्षक अलंकरण समारोह में विश्वविद्यालय स्तर से लेकर प्राथमिक स्तर तक के दस शिक्षक- शिक्षिकाओं को शिक्षक गौरव सम्मान तथा पांच शिक्षक- शिक्षिकाओं को शिक्षक श्री सम्मान से अलंकृत किया गया। आजादी की 75 वीं वर्षगांठ के कारण इस शिक्षक दिवस को अमृत महोत्सव को समर्पित करते हुए इस अवसर पर "स्वाधीनता आंदोलन में शिक्षकों का योगदान" विषयक संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न वक्ताओं ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ वाग्देवी मां सरस्वती तथा देश के द्वितीय राष्ट्रपति सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन के चित्रपट पर माल्यार्पण के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन सत्यार्थ भारत सेवा मिशन एवं महर्षि वाल्मीकि फाउंडेशन के संयोजक तथाकार्यक्रम आयोजक श्रीकान्त द्विवेदी ने किया जबकि अंतर्राष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय की उप निदेशकरेनू द्विवेदी ने अतिथियों को अंग वस्त्र तथा स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया। डायट के पूर्व प्रवक्ता व पूर्व प्रवक्ता राष्ट्रीय इंटर कॉलेज करुणा शंकर तिवारी समेत पंद्रह शिक्षक-  शिक्षिकाओं में से चार महिला शिक्षिका एवं ग्यारह पुरूष शिक्षक को सम्मान प्रदान किया गया।कार्यक्रम में आए अतिथियों को आयोजन समिति की सदस्य अनीता द्विवेदी,अंजलि पाण्डेय,ममता पाण्डेय, ऊष्मा वर्मा,अंजना सोनी ने रोली अक्षत, बैज लगाकर स्वागत किया। कार्यक्रम में डॉ जनार्दन उपाध्याय, विजय रंजन, डॉ.कृष्ण कुमार पाण्डेय, राम किशोर त्रिपाठी, ओम प्रकाश ब्रह्मचारी, सचिन दुबे आलोक मिश्रा,डा.कृष्ण कुमार मिश्रा डा.योगेंद्र नाथ पाण्डेय,संतोष द्विवेदी, आशुतोष तिवारी, योगेश्वर सिंह, कृष्ण कुमार पाण्डेय,आदर्श रंजन,अरविंद मिश्रा, मनोज श्रीवास्तव, रतनलाल,परशुराम यादव धर्मेंद्र वर्मा ,ऊष्मा वर्मा,डा.नवनिधि मिश्रा, डॉ. तूहिना वर्मा, शरद श्रीवास्तव सुनील अवस्थी, श्री नारायण द्विवेदी आदि गणमान्य जन उपस्थित रहे।

गोष्ठी में परिषदीय विद्यालयों में विभाग द्वारा प्रदत उपस्थिति पंजिका में शिक्षक के स्थान पर कर्मचारी शब्द का प्रयोग होने के संबंध में भी आवाज उठी जिस पर लोकसभा सांसद लल्लू सिंह की तरफ से संशोधन का आश्वासन दिया गया।