आर्जव धर्म हमें नम्रता सिखाता -अंतरमति

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Arjava Dharma teaches us humility - Antarmati

अवधनामा संवाददाता  

ललितपुर (Lalitpur)। वर्णीनगर मडा़वरा में पर्वराज पर्यूषण के तृतीय दिवस उत्तम आर्जव धर्म के अवसर पर नगर में चातुर्मासरत आचार्य श्रेष्ठ 108 विद्यासागर महाराज की परम प्रभावक शिष्या एवं प्रतिभा स्थली प्ररेणा आर्यिका मां 105 आदर्शमति माता जी की संघस्थ आर्यिका श्री 105 अंतरमति,अनुग्रहमति,अक्षयमति,निर्मदमति,ध्यानमति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में नगर की ह्रदय स्थली श्री महावीर विद्याविहार के परिसर में प्रात:काल श्रीजी का अभिषेकशांतिधारा,पूजन,दशलक्षण विधान एवं दोपहर में तत्वार्थसूत्र का वाचन कर श्रावकों ने अर्घ समर्पित किए एवं सायंकाल को प्रतिक्रमण,संगीतमयी आरती आदि धार्मिक क्रियायें व रात्रि में प्रवचन का लाभ श्रावकों को मिल रहा है। आज की शांतिधारा करने का सौभाग्य चातुर्मास समिति के अध्यक्ष राजेंद्र जैन,मंत्री सुमत मोदी,राजू सेठी,हर्षवर्धन सेठी,कमलेश बजाजनरेंद्र जैन सिमिरिया,सम्यक जैन,सर्वज्ञ,सतेंद्र मामा परवार को प्राप्त हुआ। रविवार के विशेष दिवस पर सुसज्जित थालियों के माध्यम से अष्ट द्रव्य से पूजन करने का सौभाग्य विद्यासमय कीर्ति मंडल एवं आचार्य विद्यासागर संस्कार वर्णी पाठशाला की शिक्षिकाओं प्राप्त हुआ। विभिन्न धार्मिक प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया। रात्रि में उदासीन आश्रम इंदौर से पधारी शशि दीदी के प्रवचनों का लाभ प्रतिदिन मिल रहा है।उत्तम आर्जव धर्म पर संबोधित करते हुए आर्यिका श्री 105 अंतरमति माता जी ने कहा कि आर्जव धर्म हमें सरलता सिखाता हैआर्जव का अर्थ है -ऋजुता या सरलता,मन में कुछ ,वचन में कुछ,व्यवहार में कुछ प्रवृत्ति ही मायाचारी है।इस माया,कषाय को जीतकर मन,वचन,काय,की क्रिया में एकरुपता लाना ही उत्तम आर्जव धर्म है।हमें संकल्प लेना होगा कि हम सरल स्वभावी बनें,कुटिलता से बचे।हमेशा दूसरों के साथ सदव्यवहार करें। सरलता ही उत्तम आर्जव धर्म का प्रतीक है।