अपने दोषों को नहीं छिपाना ही आर्जव धर्म : आर्यिका

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अपने दोषों को नहीं छिपाना ही आर्जव धर्म : आर्यिका

अवधनामा संवाददाता 

ललितपुर। दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र क्षेत्रपाल में पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन आर्जव धर्म पर धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए आर्यिका आदर्शमति माता ने कहा धर्म का संबंध सरल साफ सुथरे भावों के साथ निष्कपट व्यवहार से है । श्रावक को मन वाणी और कर्म के द्वारा जीवन व्यवहार में धारण करना होगा। जो मन से कुटिल चिन्तजन नहीं करता कुटिलता पूर्वक बोलता नहीं और न ही कुटिलता से कार्य करता है और अपने दोषों को नहीं छिपाता उसी को आर्जव धर्म कहा है। मन मे हो सो वचन उचरिए वचन होय तो सतन सो करिए  बडा कठिन कार्य है। उन्होंने कहा इन पक्तियों का आशय यह कदापि नहीं कि हमारे मन मो जो आए उसे ही हम कहने लगे और वैसा हम करने भी लगें। आर्यिकाश्री ने जीवन में सरलता के साथ आर्जव धर्म को अपनाने के लिए प्रेरित किया तभी जीवन सबका सार्थक होगा। इन दिनों क्षेत्रपाल मंदिर में आर्यिका आर्जव मति माताजी ससंघ विराजमान है जिनके सानिध्य में प्रतिदिन प्रवचन तत्वार्थ सूत्र के साथ साथ श्रावकों को सांस्कृतिक आयोजनों का लाभ भी मिल रहा है। दिगम्बर जैन नया मंदिर में आर्यिका अधिगम मति माताजी ने लक्ष्य के विना जीवन को अभिशाप बताते हुए कहा पुरूषार्थ के अनुसार गति मिलेगी छल कपट कर कहां जाएगे माया चारी से बचें जीवन यात्रा में लक्ष्य बनाना होगा तभी कल्याण है। उन्होने पर्वराज पर्यूषण कहा कर्म निश्पक्ष होता है। जीवन को सार्थक बनाने के लिए सदकर्म करो तभी कल्याण है। धर्मसभा में आर्यिका अदम्य मति माजी विराजमान रही। तत्वार्थ सूत्र का वाचन श्रुति जैन एवं अपूर्वी जैन द्वारा किया गया जवकि अर्घ समर्पण संतोष जैन डोगरा ने किया। मध्यान्ह में आर्यिका अनुपम मति माताजी ने धर्मसभा में कहा पुरूषार्थ के अनुसार गति मिलेगी। उन्होने कहा परिस्थियों पर विचार कर उन्हें टालना तथा स्वयं संभलना चाहिए यही जीवन को पवित्र पावन बनाने का मूलमंत्र है। जैन अटामंदिर में धर्मसभा में आर्यिका दुर्लभमति माताजी ने कहा कि सबसे विनम भाव से पेश आए सब प्राणियों के प्रति मैत्री भाव रखें क्योकि सभी प्राणियों को जीवन जीने का अधिकार है मृदु परिणामी व्यक्ति कभी किसी का तिरस्कार नहीं करता और यह सृष्टि का नियम है कि यहां दूसरों का आदर करने वाला स्वयं आदर पाता है। मंदिरजी में सुबह से ही श्रद्धालुओं की पूजन अभिषेक शान्तिधारा के लिए होड लगी रहती है। मध्यान्ह में धार्मिक विधान आदि कार्यक्रम हो रहे हैं।