आखिर इन बेजुबान गौवंशों का कौन है रखवाला , कौन देगा निवाला

सबसे सुरक्षित और हाईटेक तकनीक से सुसज्जित है पशु आश्रय केंद्र खपटिहा  की गौशाला--

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आखिर इन बेजुबान गौवंशों का कौन है रखवाला , कौन देगा निवाला ~

अवधनामा संवाददाता 

बाँदा सूबे की भाजपा सरकार के बडे वायदो मे शुमार है गौशालाओं का संरक्षण , जिसमे गौवंशो को सुरक्षित वातावरण मे संरक्षण देने का उद्देश्य था परंतु सरकारी मशीनरी के प्रयासों से छैः माह से अधिक हो जाने के बाद भी गायों को पोषित आहार , चिकित्सा सहित अन्य सुविधायें दे पाने मे सक्षम नजर नही आ रही है ।

वहीं खपटिहा की पशु आश्रय केंद्र गौशाला में सैकडो की संख्या मे गौवंश रखे गये हैं जिनकी जिम्मेदारी संचालक डाक्टर अनिल शर्मा के कंधो पर है । इस गौशाला के निरीक्षण मे पाया गया कि यहां गौवशों पर निगाह रखने के लिये तीसरी आंख का भी सहारा लिया जाता है । वहीं अनिल शर्मा ने अपने प्रयासों से गायों और जानवरों से प्राप्त होने वाले गोबर से जैविक खाद भी बनायी और उसको ग्रामीणों मे बांटकर एक 

संदेश भी दिया कि कैसे नई तकनीक हमारे लिये कारगर सिद्ध हो सकती है ।

वहीं उनके प्रयासों से यह भी सिद्ध हो गया कि अगर सेवा का जज्बा हो तो असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है ।

हांलाकि सरकार की ओर से पशु बाडे की साफ सफाई के लिये बाकायदा कर्मचारी भी नियुक्त किया गया है परंतु उसका पारश्रमिक भी अभी तक सरकार की ओर से नही दिया जाता है , ऐसे मे जानवरों को गुणवत्ता युक्त चारा और भोजन उपलब्ध कराना अत्यंत कठिन कार्य है कई बार जानवरों के बीमार होने पर उनकी दवा भी अपने पैसो से कराना पडता है ।

जबकि डाक्टर हरिश्चंद्र भी समय समय पर पैलानी से आकर निरीक्षण और चेकअप करते रहते हैं ।

इस पशु आश्रय केंद्र मे लगभग तीन सौ पचास से अधिक गौवंव रखे गये हैं जिनमे से लगभग दो सौ से अधिक की टैंगिंग भी हो चुकी है । प्रतिदिन कैमरो और जी पी एस जैसी आधुनिक तकनीक का पूरा फायदा इस पशु आश्रय केंद्र को मिल रहा है ।

अगर हौंसले बुलंद हो और दिल मे जानवरो से प्रेम की अभिलाषा हो तो बिना शासकीय मदद के भी छैः माह से अधिक समय तक गौवंशो को सुरक्षित संरक्षण कैसे प्रदान किया जा सकता है यह देखना हो तो पशु आश्रय केंद्र खपटिहा इसका अद्धतीय नमूना है ।