किसानों को कीटनाशक से फसलों से बचाने के लिए एडवाइजरी जारी

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किसानों को कीटनाशक से फसलों से बचाने के लिए एडवाइजरी जारी

अवधनामा संवाददाता 

ललितपुर (Lalitpur)। जिला कृषि विभाग द्वारा जनपद की खरीफ फसलों मूँगउर्द एवं सोयाबीन में लगने वाले पीला मोजेक रोग की शिकायतों के सम्बन्ध में विकास खण्ड बिरधा के कृषक कैलाश सिंह लोधी ग्राम कल्याणपुरारमेश कुमार ग्राम बिरारीगनपत ग्राम रजवारा की फसलों का पीला मोजेक रोग के सम्बन्ध में निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में पाया की कृषकों की अधिकांश फसलें अधिक वर्षा एवं प्रतिकूल वातावरण के कारण खराब हुई है। फसलों पर पीला मोजेक के लक्षण कम पाये गये। पीला मोजेक रोग से लगभग 10-15 प्रतिशत फसले प्रभावित हुई है। कुछ फसले समय पर कीटनाशकों के प्रयोग न करने एवं खरपतवारो के कारण भी प्रभावित हुई है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी द्वारा कृषकों को पीला मोजेक रोग के सम्बन्ध में सलाह दी गयी की अपनी फसलों की प्रतिदिन निगरानी करते रहे तथा फसलों जैसे उर्दमूँग एवं सोयाबीन की फसल में पीला चित्तवर्ण रोग (पीला मोजेक) का प्रकोप दिखाई देने पर उचित नियंत्रण के उपाय अपनाये। किसानों को सलाह दी गयी कि पीला चितवर्ण रोग (पीला मोजेक) रोग का प्रकोप होने पर खेत से रोगी पौधों को उखाडकर मिट्टी में दबाकर नष्ट कर दें तथा 5 प्रतिशत से अधिक पौधे प्रभावित (आर्थिक क्षति स्तर) दिखाई देने पर पीला मोजेक एवं माँहू कीट के नियंत्रण हेतु फसल में डाईमिथोएट 30 प्रति.ई.सी.की 1 लीटर मात्रा या इमीडाक्लोप्रिड 17.8 प्रति. एस.एल. की 250 से 300 एम.एल. मात्रा या प्रोफेनोफांस 40: सायपर मेथ्रिन 4: ई.सी. की 1 लीटर मात्रा को तथा फूफूंदीनाशक रसायन कार्बेन्डाजिम 12 मेन्कोजेब 63 की 1 किलोग्राम मात्रा को 500-600 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हैक्टयर की दर से फसल में छिडकाव करें। साथ ही उर्द एवं मूॅग की फसल में इल्ली का प्रकोप दिखाई देने पर इल्ली एवं फली भेदक के नियत्रंण हेतु क्यूनॉलफॉस 25 प्रतिशत ई.सी. की 1.5 लीटर मात्रा या लेम्डा सायहेलोथ्रीन 5 प्रति. ई.सी. की 1 लीटर मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिडकाव करें। समस्त कृषक बन्धुओं को सूचित किया जाता है कि कृषि विभाग उ0प्र0 के कृषि रक्षा अनुभाग द्वारा फसलों में कीट/रोग सम्बन्धी समस्या के समाधान हेतु सहभागी फसल निगरानी एवं निदान प्रणाली (पी0सी0एस0आर0एस0) एक नवीन प्रणाली शुरू की है। इसमें विभाग द्वारा दो नम्बर 9452247111 एवं 9452257111 दिये गये है। इन नम्बरों पर आप अपना कृषक पंजीकरण नम्बर या अपना नामग्राम का नामविकास खण्डजनपद का नाम एवं फसल में लगने वाले कीट/रोग का नामलक्षण/फोटो सहित विवरण उपरोक्त नम्बरों पर एस0एम0एस0/व्हाट्सअप के माघ्यम से भेजकर अपनी समस्या का समाधान 48 घण्टें में प्राप्त कर सकते है। साथ ही सभी कीटनाशक विक्रेताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी दुकान के बाहर रेट बोर्डस्टॉक बोर्ड अवश्य लगायें। प्रत्येक कृषक को बिल/कैश मेेमो जारी करें। कृषकों को कृषि रक्षा रसायन के प्रयोग के सम्बन्ध में आवश्यक प्रयोग विधि/निर्देशों की भी जानकारी प्रदान करें। अन्यथा आप द्वारा दिये गये कीटनाशक/खरपतवारनाशक से कृषक को किसी प्रकार की क्षति होती है तो आपके विरूध्द कीटनाशी अधिनियम 1968 के अन्तर्गत कठोर कार्यवाही की जायेगी।