उडान मे बाधा बन रहे भवनो पर चला प्रशासन का बुलडोजर

72 मकानों को हटाने का प्रशासन ने लिया निर्णय

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उडान मे बाधा बन रहे भवनो पर चला प्रशासन का बुलडोजर

अवधनामा संवाददाता 

कुशीनगर। अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा से उड़ान में बाधक बन रहे भवनो पर सोमवार को जिला प्रशासन का बुलडोजर चला। प्रशासन ने उडान मे बाधा बन रहे आधा दर्जन से अधिक भवनो के ऊपरी मंजिल तोडवाते हुए भवन स्वामियों को तीन दिन का मोहलत दिया है। जिला प्रशासन ने यह सख्त रुख कसाडा के नियम के तहत अपनाया है।बता दें कि प्रथम चरण में उड़ान में अवरोधक बन रहे मुख्य 10 भवन ध्वस्त किए जाएंगे। प्रशासन इन भवनो पर  बुलडोजर चलाना शुरू कर दिया है। यह कार्रवाई कुशीनगर विशेष क्षेत्र प्राधिकरण (कसाडा) के नियमों के तहत की जा रही है। कहना न होगा कि एसडीएम वरुण कुमार पांडेय व तहसीलदार मंधाता प्रताप सिंह ने बीते दिनो भलुही मदारी पट्टी के भवन स्वामियों से घंटों वार्ता की, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। भवन स्वामी भूमि के बदले भूमि की मांग पर अड़िल रहे, जबकि तहसील प्रशासन केवल प्रतिकर देने की बात कर रहा है। एयरपोर्ट की जांच में डायरेक्टर जनरल सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने उड़ान में बाधक बन रहे बेलवा दुर्गाराय एवं भलुही मदारी पट्टी के कुल 72 मकानों को हटाने के लिए एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया को निर्देश दिया है। अथारिटी ने इन भवनों को हटाने की मांग प्रशासन के सामने रखी। इस बीच एयरपोर्ट का उद्घाटन होने के बाद 26 नवंबर से शुरू होने जा रही उड़ान को देखते हुए प्रशासन ने कार्रवाई तेज की है। सोमवार को बेलवा दुर्गाराय में प्रसाशनिक कार्यवाई में महेंद्र गुप्ता, सुखपाल गुप्ता, अनिल राय, नंदकिशोर राय, शशांक राय, मयंकेश्वर गुप्ता, आशुतोष गुप्ता, चन्द भूषण मिश्र आदि की मकान का ऊपरी हिस्सा जेसीवी मशीन से हटाया गया। 

भूमि के बदले भूमि की मांग अडे भूमि स्वामी

भवन स्वामी बैद्यनाथ दूबे, रमाशंकर दूबे, अशोक लाल श्रीवास्तव, अंबरीश लाल श्रीवास्तव, अक्षयबर दूबे, श्रीकांत प्रजापति, जगलाल प्रजापति, वरुण श्रीवास्तव आदि ने भूमि के बदले भूमि की मांग करते हुए अन्य कोई भी विकल्प मानने से इन्कार कर दिया। उनका कहना था कि भवन का प्रतिकर तो प्रशासन दे रहा है, लेकिन भवन बनाने के लिए भूमि नहीं दे रहा। ऐसे में वार्ता का कोई मतलब नहीं है।

कसाडा के नियमो के तहत होगी कार्रवाई

उपजिलाधिकारी व कसाडा सचिव वरुण कुमार पाण्डेय का कहना है  कि प्रथम चरण में छह अवरोधकों (मकानों) के ऊपरी मंजिल को ध्वस्त किया गया है।यह कार्रवाई कसाडा के नियमों के तहत की गयी है।