हमीरपुर के 16 एम्बुलेंस कर्मी बुखमरी के कगार पर

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हमीरपुर के 16 एम्बुलेंस कर्मी बुखमरी के कगार पर

अवधनामा संवाददाता (हिफजुर्रहमान) 

हमीरपुर : अपनी ज़िन्दगी को खतरे में डाल कर दूसरों की जिन्दगी बचाने वाले एम्बुलेंस स्टाफ आज खुद भुखमरी के कगार पर खड़ा है। कोरोना संक्रमण की जान लैवा  दूसरी लहर के बीच लोगों की जिंदगी बचाने वाले एक-दो नहीं बल्कि सोलह एंबुलेंस स्टाफ के कर्मचारी इस वक्त बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं। आसपास के जनपदों से चयनित होने के बाद जनपद में अपनी सेवाएं दे रहें इन कर्मचारियों को इसी साल एंबुलेंस सेवा प्रदाता कंपनी में हुए फेरबदल के बाद शुरू हुए आंदोलन की आड़ में नौकरी से बेदखल कर दिया गया था। इनमें संगठन के पदाधिकारियों को निशाना बनाया गया था। जनपद के भी सोलह एंबुलेंस कर्मी इस वक्त दुर्दिनों का सामना कर सरकार की ओर अपेक्षा भरी नजरों से देख रहे हैं। 
याद कीजिए जब कोरोना की दूसरी लहर में रोज किसी न किसी की मौत की खबरें आ रही थी। कोरोना संक्रमित व्यक्ति को परिवार के लोग ही अछूत मानकर छोड़ दे रहे थे। ऐसे आड़े वक्त में 108, 102 नंबर एंबुलेंस चलाने वाला स्टाफ ही ऐसे मरीजों के काम आ रहा था। संक्रमित मरीज को घर से अस्पताल तक पहुंचाना और ठीक होने के बाद छोड़ना जैसे काम उन्हीं के हिस्से में थे। यहां तक कि चलती एंबुलेंस में कोरोना की वजह से दम तोड़ने वालों को भी एंबुलेंस कर्मियों ने उनके घर तक पहुंचाया था। इन विपरीत हालातों का सामना करने के बावजूद इसी साल जुलाई माह में एंबुलेंस प्रदाता कंपनी में फेरबदल होने के बाद मानदेय में की गई कमी का आंदोलन इन कोरोना के देवदूतों पर भारी पड़ गया।
कई दिनों तक जिले में भी एंबुलेंस कर्मी हड़ताल पर रहे थे। सुमेरपुर के तपोभूमि मैदान में एंबुलेंस खड़ी करके प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों ने मरीजों की समस्या बढ़ा दी थी। प्रशासन ने दबाव बनाकर एंबुलेंस कर्मियों से चाबी छीन प्राइवेट व्यक्तियों से एंबुलेंस का संचालन कराया था। इस आंदोलन की कीमत जनपद के 16 एंबुलेंस कर्मियों को अपनी नौकरी से हाथ धोकर चुकानी पड़ी है। इनमें जीवन दायिनी संघ 108-102 के जिलाध्यक्ष महेश कुमार, उपाध्यक्ष सरताज आलम सहित 16 ईएमटी और पायलट हैं। 
सरताज बताते हैं कि पांच माह से कोई काम नहीं है। अपने घर फतेहपुर लौट चुके हैं। लखनऊ के ईको गार्डेन में कर्मियों का धरना चल रहा है, लेकिन अभी तक शासन का ध्यान नहीं गया है। धनाभाव से परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। कोरोना काल में स्वयं प्रधानमंत्री ने एंबुलेंस चालकों से लेकर सभी स्वास्थ्य कर्मियों की प्रशंसा की थी, लेकिन आज जो दुर्दशा हो रही है, उसकी तरफ कोई देखने वाला नहीं है। अभी जो लोग एंबुलेंस कर्मी के तौर पर सेवा दे रहे हैं, उन्हें कम पैसों का भुगतान किया जा रहा है, लेकिन बेकारी से बेगारी भली समझकर लोग इसे कर रहे हैं। अभी तो वह लोग सिर्फ प्रतीक्षा कर रहे हैं कि कब उनकी नौकरी बहाल होती है।