शुआट्स में मनाया गया 111वाँ स्थापना दिवस

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शुआट्स में मनाया गया 111वाँ स्थापना दिवस

अवधनामा संवाददाता


प्रयागराज। सैम हिग्गिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय (शुआट्स) में बुधवार को 111वाँ स्थापना दिवस मनाया गया। कोविड -19 महामारी के कारण छात्र और कर्मचारी वर्चुअल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संस्थापक दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए हैं, जबकि निदेशकगण, डीन आदि ने सोशल डिस्टेन्सिंग व सुरक्षा के साथ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
शुरूआत परमेश्वर की प्रार्थना से हुई। गॉस्पल एवं प्लाऊ इन्स्टीट्यूट आफ थियोलॉजी के छात्र-छात्राओं ने गीत की प्रस्तुति दी साथ ही ‘धन्यवाद तू प्रभु का कर, उठकर सुबह और शाम’ भजन की प्रस्तुति भी दी। हेल्थ एण्ड एलाईड साइंस की शिक्षिकाओं ने गुनाहों से दबा हुआ, बोझ से भरा हुआ भजन की प्रस्तुति दी।
कुलपति प्रो (डॉ) राजेंद्र बी लाल ने सभी को स्थापना दिवस की शुभकामनायें देते हुए कहा कि परमेश्वर के आशीष से डा. सैम हिग्गिनबॉटम ने वर्ष 1910 में इलाहाबाद एग्रीकल्चरल इंस्टीट्यूट की स्थापना की। उन्होंने गांव-गांव जाकर किसानों की जर्जर हालत को देखा इसके बाद वे अमेरिका गये और वहां से नई तकनीक को सीखकर आये जिसे इलाहाबाद में लागू किया। परिणामस्वरूप किसानों को भारत में पहली बार वाह वाह हल, यूपी नं01, यूपी नं02, शाबाश हल, कुदाली, कल्टीवेटर, गेहूँ थ्रेसर प्राप्त हुआ। उस समय बिजली की समस्या थी, जमीनें बंजर थीं आज परमेश्वर की कृपा से क्षेत्र में चारों ओर तरक्की हो रही है। डा. आर.बी. लाल ने कहा कि संस्थापक डा. सैम हिग्गिनबॉटम द्वारा स्थापित संस्थान आज उ0प्र0 शासन द्वारा मान्यता प्राप्त पूर्ण विश्वविद्यालय बन चुका है। उन्होंने कहा कि ये उनका स्वप्न है कि यह भविष्य में सेन्ट्रल विश्वविद्यालय के रूप में डिग्री अवार्डिंग संस्थान बने।
प्रति कुलपति (शैक्षिक) प्रो. ए.के.ए. लॉरेन्स ने संस्थापक डा. सैम हिग्गिनबॉटम के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने किसानों व नौजवानों को कृषि क्षेत्र की विभिन्न तकनीकों में प्रशिक्षित कर, भारत को खाद्य उत्पादन में आत्म निर्भर बनाने के लिये ‘भूखे को भोजन’ व ‘भूमि की सेवा’ के उद्देश्य से इलाहाबाद एग्रीकल्चरल इंस्टीट्यूट की स्थापना वर्ष 1910 में की। डा. सैम हिग्गिनबॉटम के नेतृत्व में उन्नत कृषि यंत्रों पर प्रशिक्षण, कृषि प्रसार योजनायें प्रारंभ हुआ, अच्छी नस्लों के पशु, अधिक उपज वाली गेहँू व धान की प्रजातियां विकसित हुईं व उर्वरकों का सही उपयोग प्रारम्भ हुआ। उनके द्वारा स्थापित संस्थान आज कुलपति मोस्ट रेव्ह प्रो. राजेन्द्र बी. लाल के नेतृत्व में पूर्ण विश्वविद्यालय के रूप में कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं विज्ञान के क्षेत्र में देश व प्रदेश की सेवा कर रहा है।
इस अवसर पर प्रति कुलपति (प्रशासन) प्रो. एस.बी. लाल, कुलसचिव प्रो. रॉबिन एल. प्रसाद, निदेशक आईपीसी प्रो. जोनाथन ए. लाल, संयुक्त कुलसचिव (प्रशासन) डा. सी.जे. वेसली, पीआरओ एवं मीडिया प्रभारी डॉ. रमाकांत दुबे आदि उपस्थित रहे।