एक-दूसरे से गले मिले तो दूर हुए बरसों पुराने शिकवे
ललितपुर। लगातार 30 दिनों तक रोजा रखने और अल्लाह की इबादत करने के बाद सोमवार को जब ईद आई तो चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई। सारे गम हवा हो गए। होठों पर मुस्कराहट थीं तो जबाँ पर मुहब्बत की बातें। एक-दूसरे से गले मिले तो बरसों पुराने शिकवे दूर हो गए। फिजा में सिर्फ ईद मुबारक.. ईद मुबारक की गूँज थीं। ईद हो और सेवईयों का जिक्र न हो, यह मुमकिन नहीं है। सो, दस्तरखान पर नए-पुराने दोस्त, रिश्तेदार, पड़ौसी सभी मौजूद थे। आपसी सौहार्द को बढ़ाना था, इसलिए क्या हिन्दू, क्या ईसाई और क्या मुसलमान। सभी ने एक साथ बैठकर लजीज पकवानों का लुत्फ उठाया। मुस्लिम इलाकों में जश्न जैसा माहौल रहा।
ईद-उल-फितर का पर्व मुस्लिम समुदाय द्वारा श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया गया
शहर में ईदगाह समेत अन्य मस्जिदों में ईद की नमाज अदा की गई और मुल्क के अमन चैन व सलामती की दुआओं के लिए एक साथ हजारों हाथों उठे। तुवन के पास स्थित ईदगाह पर शहर पेश इमाम हाफिज मुवीन खान ने नमाज अदा कराई। इसके बाद खुतवा पढ़ कर सुनाया। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी। जिले का सांप्रदायिक सौहार्द देश में मिसाल कायम किए है। ईद मनाने में सभी वर्ग के लोगों ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। इस मौके पर असलम कुरैशी, उर्स कमेटी सदर बाबू बदबरुद्दीन कुरैशी, अबरार अली, मोहम्मद नसीम, नायब सदर अब्दुल रहमान कल्ला, हाजी साबिर अली, रमजानी दादा, मुशतफा पार्षद, आदि उपस्थित रहे। ईदगाह के अलावा जामा मस्जिद, कदीमी मस्जिद, बाबा सदनशाह दरगाह, गोविंदनगर, बरिया वाली, मस्जिद, मस्जिद मसीद चिरौलपुरा, पुलिस लाइन आदि मस्जिदों में धर्म गुरुओं ने परंपरागत ढंग से ईद की नमाज अदा कराई। सुबह-सुबह हर तरफ नए कपड़ों, इत्र की खुशबुओं से लवरेज रोजेदार, नमाजी ईदगाह की ओर बढ़ रहे थे।
7.46 बजे तक ईदगाह के चारों ओर नमाजी जमा हो गये थे। जिसको जहाँ जगह मिली वहां कपड़ा बिछा लिया और नमाज पढऩे की तैयारी पूरी कर ली। जो दूर से आए थे, उन्होंने वजू किया और अपनी जगह पर बैठ गए। ईद की नमाज सुबह 8.15 बजे शुरू हुई। शहर पेश इमाम हाफिज मुवीन खान ने नमाज अदा कराई। इससे पहले उन्होंने 20 मिनिट तक रमजान, ईद, रोजे, फितरा और जकात के बारे में समझाया। उन्होंने अपील की कि हर मुसलमान फितरा जरूर निकालें, ताकि जरूरतमंद और मुफलिसी का शिकार मुसलमान भी ईद मना सकें। उन्होंने कहा कि परिवार में जितने शख्स हैं उतने लोगों का फितरा अदा करें। उन्होंने कहा कि ललितपुर में अमन चैन कायम है और रहेगा। यहा की कौमी एकता की मिशाल दूर-दूर तक है। सभी समुदाय मिलजुल कर एक साथ सुख-दुख बाट रहे हैं। मुल्क के साथ साथ हर एक कौम की तरक्की हो।
अब्बू के कन्धों पर ईदगाह पहुँचे बच्चे
ईद का मौका था, इसलिए बच्चों की हर ख्वाहिश पूरी की गई। गुरूवार को ईद की नमाज के लिए लोग खुद तो पहुंचे ही, वे छोटे-छोटे बच्चों को लेकर भी आए। कुछ बच्चे तो इतने छोटे थे कि वे अब्बा के कंधों पर थे। रंग-बिरंगे कपड़ों में लिपटे बच्चों ने जब गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी तो पूरा माहौल खुशनुमा हो गया।
नेक कामों में आगे बढ़े मुसलमान
ईदगाह में नमाज से पहले शहर पेश इमाम हाफिज मुवीन खान ने लोगों को खिताब किया। उन्होंने कहा कि मुसलमान नेक कामों में आगे बढ़े। पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब की सुन्नत पर अमल हो। कुरान के हुक्मों को जिंदगी में उतारें। उन्होंने युवाओं को मुखातिब करते हुए कहा कि वे इंटरनेट का इस्तेमाल अच्छी चीजों के लिए करें। मां-बाप अपने बच्चों को दीन और दुनियावी दोनों तालीम दिलाएं। उन्होंने लोगों को दीन की रस्सी को मजबूती से पकडऩे की नसीहत दी। कहा लोग दूसरों का हक जरूर अदा करें। अल्लाह के यहा इसका सवाल होगा।
लजीज पकवानों से सजा दस्तरखान
ईद का मौका, तो सो दिल के साथ ही दस्तरखान भी बड़ा हो गया। दस्तरखान पर शरबती और किमामी सेवई के साथ ही छोला, दही बड़ा, पकौड़ी, पापड़ इत्यादि मौजूद थी। लोगों ने एक-दूसरे के घर पहुंचकर जायकेदार पकवानों का लुत्फ उठाया। लोगों ने मेहमान नवाजी में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा।
ईदगाह के साथ मस्जिदों पर रही विशेष सतर्कता
ईद को लेकर शहर समेत पूरे जनपद में विशेष सुरक्षा व्यवस्था रही। शहर में ईदगाह के अलावा अन्य मस्जिदों में महिला व पुरुष जवान तैनात किए गए थे। इसके अलावा कहीं कोई कमी न रह जाए, इसकी वीडियो रिकॉर्डिग भी कराई गई। सिविल ड्रेस में भी कुछ पुलिस जवानों को यहाँ तैनात किया गया था।





