उत्तर प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश को निर्यात हब बनाने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रही है। सरकार की नई नीति के तहत स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने, रोजगार सृजन बढ़ाने और विदेशी मुद्रा अर्जन के लिए निर्यातकों को हर स्तर पर सहायता दी जा रही है।
प्रदेश के सभी 75 जनपदों को पोटेंशियल एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की कार्यवाही चल रही है। इसके तहत जिला निर्यात प्रोत्साहन समितियाँ निर्यातकों की जरूरतों के अनुसार हैंडहोल्डिंग सपोर्ट, प्रशिक्षण और निर्यात कार्य योजना पर काम कर रही हैं। निर्यातकों की समस्याओं के समाधान हेतु विदेश व्यापार निदेशालय और केंद्र सरकार के अधिकारियों के साथ नियमित संवाद भी जारी है।
सरकार की ओर से हेल्प डेस्क, दक्षता संवर्धन कार्यशालाएं, तथा क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें निर्यात प्रक्रिया, फॉरेन ट्रेड पॉलिसी 2023, और जोखिम प्रबंधन जैसे विषयों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
प्रदेश की नई निर्यात नीति 2025-2030 बनाने के लिए निर्यातकों, संघों और परिषदों से सुझाव लेकर एक संवाद सत्र भी आयोजित किया गया। इस दौरान उत्कृष्ट निर्यातकों को सम्मानित किया गया।
सरकार ने विपणन विकास सहायता योजना, माल भाड़ा अनुदान योजना और वायुयान भाड़ा युक्तिकरण योजना को पूरी तरह ऑनलाइन व पारदर्शी बनाया है। लखनऊ में ट्रेड प्रमोशन सेंटर और विभिन्न जिलों में टेस्टिंग लैब, पैकेजिंग सेंटर व स्किल डेवलपमेंट हब जैसी अवस्थापना सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं।
निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आयोजित UP International Trade Show-2024 (ग्रेटर नोएडा) में प्रदेश के 2000 से अधिक उद्यमियों ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया। इस मेले में 70 देशों के 500 विदेशी खरीदारों ने हिस्सा लिया और बड़ी संख्या में व्यापारिक अनुबंध हुए। इसी क्रम में गोरखपुर ट्रेड शो और भारत मण्डपम, नई दिल्ली में आयोजित भारत टेक्स-2024 में उत्तर प्रदेश ने पार्टनर स्टेट के रूप में शानदार उपस्थिति दर्ज की।
प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश का हर जिला ‘निर्यात से आत्मनिर्भरता’ की दिशा में अग्रसर हो और प्रदेश भारत का निर्यात पॉवरहाउस बने।





