ISIS Agent Haris: एटीएस को यह जानकारी मिली है कि आइसिस की विचारधारा को प्रचारित करने के लिए हारिस डार्क वेब का ही इस्तेमाल कर रहा था।
लखनऊ। डार्क वेब तो आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है। प्रतिबंधित आतंकी संगठन आइसिस के सक्रिय एजेंट हारिस की गिरफ्तारी के बाद अभी तक एटीएस की टीमें उसके डार्क वेब का इस्तेमाल कर भेजे गए संदेशों की जानकारी नहीं जुटा पाई हैं।
हारिस मुरादाबाद के एक मेडिकल कालेज से डाक्टरी की पढ़ाई कर रहा था और डार्क वेब के जरिए ही वह आइसिस के हैंडलरों से संपर्क में रहता था। आरोपित ने डार्क वेब के जरिए आइसिस के हैंडलरों को कई मेल व फोटो भी उपलब्ध कराए थे।
एटीएस ने सहारनपुर निवासी हारिस को पिछले सप्ताह मुरादाबाद से गिरफ्तार किया था। वह मुरादाबाद के एक मेडिकल कालेज से डेंटिस्ट की पढ़ाई कर रहा था। एटीएस ने अदालत से उसे पांच दिन के रिमांड पर लेकर पूछताछ की है। पूछताछ में हारिस ने आइसिस के लिए काम करने वाले दस एजेंटों के नाम बताए हैं। यह सभी हारिस के जरिए ही आइसिस से जुड़े थे।
उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार व पंजाब के रहने वाले इन एजेंटों से कभी हारिस की मुलाकात नहीं हुई थी। यह सभी डार्क वेब के माध्यम से बने ग्रुपों के जरिए एक दूसरे से कोडवर्ड में बात करते थे। हारिस ने अपने हैंडलरों को डार्क वेब के जरिए कई मेल व संवेदनशील स्थलों की फोटो व नक्शे भेजे थे। एटीएस उससे दस सहयोगियों के नाम जरूर उगलवा पाई है, लेकिन उसने आइसिस को जो भी संदेश भेजे उनको तो अभी तक नहीं खोज पाई है।
सूत्रों के अनुसार एटीएस को यह जानकारी मिली है कि आइसिस की विचारधारा को प्रचारित करने के लिए हारिस डार्क वेब का ही इस्तेमाल कर रहा था। करीब डेढ़ वर्ष पहले उसने कश्मीर में इसका प्रशिक्षण भी हासिल किया था। फिलहाल आइसिस की डार्क वेब की दुनिया का राजफाश करने के लिए एटीएस साइबर विशेषज्ञों की मदद ले रहा है। शनिवार को उसके रिमांड का अंतिम दिन है।
क्या होता है डार्क वेब
डार्क वेब इंटरनेट का वो हिस्सा है, जहां वैध और अवैध दोनों तरीके के कामों को अंजाम दिया जाता है। इंटरनेट का 96 फीसद हिस्सा डीप वेब और डार्क वेब के अंदर आता है। हम इंटरनेट कंटेंट के केवल 4% हिस्से का इस्तेमाल करते है, जिसे सरफेस वेब कहा जाता है। डीप वेब पर मौजूद कंटेंट को एक्सेस करने के लिए पासवर्ड की जरूरत होती है जिसमें ई-मेल, नेट बैंकिंग, आते हैं। डार्क वेब को खोलने के लिए टॉर ब्राउजर (Tor Browser) का इस्तेमाल किया जाता है। डार्क वेब पर ड्रग्स, हथियार, पासवर्ड, चाईल्ड पॉर्न जैसी बैन चीजें मिलती हैं।
कैसे काम करता है डार्क वेब
आपको बता दें कि डार्क वेब ओनियन राउटिंग टेक्नोलॉजी पर काम करता है। ये यूजर्स को ट्रैकिंग और सर्विलांस से बचाता है और उनकी गोपनीयता बरकरार रखने के लिए सैकड़ों जगह रूट और री-रूट करता है। आसान शब्दों में कहा जाए तो डार्क वेब ढेर सारी आईपी एड्रेस से कनेक्ट और डिस्कनेक्ट होता है, जिससे इसको ट्रैक कर पाना असंभव हो जाता है। यहां यूजर की इन्फॉर्मेशन इंक्रिप्टेड होती है, जिसे डिकोड करना नाममुकिन है। डार्क वेब पर डील करने के लिए वर्चुअल करेंसी जैसे बिटकॉइन का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा इसलिए होता है, ताकि ट्रांजैक्शन को ट्रेस न किया जा सके।
डार्क वेब पर होते हैं ये स्कैम
डार्क वेब पर हत्याओं की सुपारी देने से लेकर हथियारों की तस्करी तक कई अवैध काम होते हैं। डार्क वेब पर यूजर्स से उनकी पर्सनल डिटेल लीक करने की धमकी देकर उनसे मोटे पैसे वसूले जाते हैं। डार्क वेब पर ढेर सारे ऐसे भी स्कैमर्स होते हैं, जो बेहद सस्ते में वो चीजें भी बेचते हैं जो बैन हैं। बहुत से लोग वहां सस्ते फोन खरीदने के चक्कर में लाखों रुपये गवां देते हैं।





