पंद्रह सौ किलोमीटर की दूरी तय कर पचनद पर संपन्न हुई चंबल विकास यात्रा
चकरनगर/इटावा। चंबल विकास यात्रा सोमवार को पचनद स्थित कालेश्वर धाम मंदिर पर संपन्न हुई।यह यात्रा मध्य प्रदेश के इंदौर के पास मऊ जानापाव से शुरू हुई थी और इसने करीब 1500 किलोमीटर की दूरी तय की।समापन समारोह में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और उत्कृष्ट कार्य करने वाले समाजसेवियों को सम्मानित किया गया।सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एपी सिंह ने यात्रा के समापन की घोषणा की।इस अवसर पर चंबल विकास यात्रा के राष्ट्रीय संयोजक जोगिंदर सिंह भदौरिया ने उनका स्वागत किया।
अपने संबोधन में,राष्ट्रीय संयोजक जोगिंदर सिंह भदौरिया ने कहा कि राजस्थान,उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बहने वाला चंबल नदी का अंचल वीरता और बलिदान की भूमि रहा है।उन्होंने इस क्षेत्र के युवाओं की सेना और अर्धसैनिक बलों में उल्लेखनीय भागीदारी और देश की रक्षा में दी गई शहादत का उल्लेख किया।श्री भदौरिया ने यह भी बताया कि बीहड़ क्षेत्र होने के कारण चंबल अंचल को अपेक्षित विकास नहीं मिल पाया है।
यात्रा के दौरान तीनों राज्यों के 21 जिलों से राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को ज्ञापन भेजे गए।इन ज्ञापनों में चंबल विकास बोर्ड के गठन,चंबल रेजीमेंट की स्थापना और क्षेत्र में गो अभयारण्य व अन्य विकास योजनाएं लागू करने की मांग की गई।समापन समारोह के दौरान चंबल,यमुना,सिंध,पहुंच और कुंवारी नदियों के संगम स्थल पर चंबल मैया की आरती की गई।इस अवसर पर समाजसेवी बापू सहेल सिंह परिहार, स्टील पाइप कंपनी के निदेशक मोती सिंह और शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय सुरेश भदौरिया सहित एक दर्जन से अधिक प्रमुख व्यक्तियों को प्रतीक चिन्ह और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। चंबल मैया की आरती और जयघोष के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।





