लोकसभा चुनाव में मिली सफलता से उत्साहित सपा आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुट गई है। अखिलेश यादव ‘पीडीए’ दांव को मजबूत करते हुए भाजपा को चुनौती देने की रणनीति बना रहे हैं।
लोकसभा चुनाव में मिली बढ़त से उत्साहित सपा आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर न सिर्फ आत्मविश्वास से भरी है, बल्कि तैयारियों में भी कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती।
अपने पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) दांव को फिर मजबूत अस्त्र के रूप में उपयोग करते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव जमीनी मोर्चे पर भाजपा को पछाड़ने की मंशा से कई रणनीतिकारों के साथ मिलकर रणनीति बनाने में जुट चुके हैं।
लोकसभी चुनाव में मिली ज्यादा सीटें
चुनावी तैयारियों की शुरुआत सीट और क्षेत्रवार सर्वे के साथ हो चुकी है। समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल है। 2017 में मिलीं 47 सीटों के मुकाबले 2022 में 111 पर पहुंची सपा (वर्तमान में 102 विधायक) सत्ता से तो दूर रही, लेकिन इस बढ़त ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को संबल जरूर दिया।
इसी संबल को संभाले हुए वह एम-वाई यानी मुस्लिम-यादव गठजोड़ की पारंपरिक रणनीति को छोड़कर 2024 के लोकसभा चुनाव में पीडीए का फार्मूला लेकर उतरे। सपा 2019 में मिलीं पांच सीटों के मुकाबले बड़ी उछाल के साथ 2024 में सीधे 37 सीटों पर पहुंच गई।
परिणामस्वरूप इन दो सफलताओं ने न सिर्फ सपा नेतृत्व को, बल्कि कार्यकर्ताओं में भी इस ऊर्जा और विश्वास का संचार कर दिया है कि सपा 2027 में भाजपा का विजय रथ रोक सकती है। पार्टी के वरिष्ठ नेता ने बताया कि पिछले दिनों सपा अध्यक्ष की भेंट कोलकाता में चर्चित रणनीतिकार पीके के साथ हुई थी।
पीके की आइ-पैक की टीम ने उत्तर प्रदेश में अपने स्तर से काम शुरू कर दिया है। बताया गया है कि आइ-पैक के साथ ही दो-तीन अन्य एजेंसियों की मदद भी सपा ले रही है। इन सभी रणनीतिक सलाहकारों ने विधानसभा सीटों के अनुरूप मजबूत मुद्दे, जनता से जुड़ाव के विषय, जातीय समीकरण और मजबूत-जिताऊ प्रत्याशी पर सर्वे शुरू कर दिया है।
कांग्रेस से होगा गठबंधन?
चूंकि, बिहार में विपक्षी गठबंधन को गड़बड़ाए तालमेल से बहुत नुकसान उठाना पड़ा, इसलिए उससे सबक लेते हुए सपा नेतृत्व ने अभी सिर्फ कांग्रेस से संभावित मजबूत दावेदारों की सूची ले ली है। सीटों के बंटवारे से किसी भी अनपेक्षित विषय को चर्चा में लाने से बचते हुए सपा पहले अपनी जमीनी तैयारी कर लेना चाहती है।





