सेवा ही सच्चा धर्म है, मानव को राम और कृष्ण चरित्र से लेनी चाहिए प्रेरणा
सिद्धार्थनगर। संगीतमयी श्रीराम कथा के अवसर पर अयोध्या धाम से आए कथा व्यास पंडित देव कृष्ण शास्त्री ने समाज, श्रद्धा, धर्म और वर्तमान समय में सनातन संस्कृति की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मानव जीवन तभी सार्थक है जब उसमें सेवा, संस्कार और भक्ति का भाव हो। कहा कि आज समाज को सबसे पहले स्वयं को नई ऊंचाई पर ले जाने की आवश्यकता है। यह तभी संभव है जब हम अपने धर्म, अपने आदर्शों और महान महापुरुषों को स्मरण करें। सनातन संस्कृति ने हमें केवल धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की पद्धति दी है। उसे अपनाना ही आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
अयोध्या धाम से आए कथा व्यास पंडित देव कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जब मानव अपने धर्म और संस्कृति से जुड़ता है, तब उसका जीवन मूल्यवान बनता है। हमें अधिक से अधिक राम चरित्र और श्री कृष्ण चरित्र का श्रवण करना चाहिए, क्योंकि इनके जीवन में धर्म, नीति, त्याग और आदर्शों का अद्भुत समन्वय है। ये चरित्र हमें हमेशा प्रेरित करते हैं। कहा कि कलयुग में भक्ति ही सबसे बड़ा सहारा है। मानव को चाहिए कि वह अपने जीवन में श्रद्धा और भक्ति के प्रति रुचि रखे। जब मन भगवान की ओर होता है, तो जीवन में शांति और संतोष मिलता है। कहा कि मानव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य सेवा है।
सेवा ही ऐसा मार्ग है जो हमें सच्चे धर्म की ओर प्रेरित करता है। बिना सेवा के जीवन अधूरा है। चाहे वह समाज की हो, राष्ट्र की हो या किसी जरूरतमंद मनुष्य की सेवा ही सबसे बड़ा पुण्य है। बताया कि आधुनिक समाज और विशेषकर युवाओं को अपने इतिहास, संस्कृति और पवित्र ग्रंथों से जोड़ना होगा। कथा, कीर्तन, सत्संग और संस्कार आधारित शिक्षा इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जब युवा अपने मूल से जुड़े रहेंगे, तभी राष्ट्र मजबूत बनेगा। अंत में उन्होंने कहा कि धर्म को जियो, सेवा को अपनाओ और भगवान के चरित्रों से जीवन में प्रेरणा लो। यही मानवता का असली मार्ग है और यही सनातन की आत्मा।





