मुझको मोहताज किसी का नहीं होने देंगे सदनशाह बाबा

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लाज रख लेते हैं हर एक जगह पर मेरी सदनशाह बाबा
उर्स के तीसरे दिन सुबह चार बजे तक जमी रही महफिल

ललितपुर। महान सूफी सन्त हजरत बाबा सदनशाह रहमत उल्लाह अलैह की दरगाह पर चल रहे सालाना उर्स इजलास के तीसरे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सभी धर्म के श्रद्धालुओं ने बाबा की दरगाह पर चादर चढ़ाकर मन्नतें माँगी। मशहूर फनकार दानिश इकबाल साबरी की कव्वालियों ने अपने फन का ऐसा जादू बिखेरा कि लोग झूमने पर मजबूर हो गए। श्रोता कब्बालियों का लुत्फ उठाते रहे। अजीम सूफी सन्त हजरत सदनशाह रहमत उल्ला अलैह के सालाना उर्स के मौके पर बुधवार की रात मशहूर फनकार दानिश इकबाल साबरी की महफिल सजी रही। उन्होंने रात से सुबह चार बजे तक खुदा और नवी की शान व ख्वाजा और बाबा सदन की शान में मनकवत का पढ़ी। इसके बाद गजल का दौर चला। कव्वाल समाँ बांधे रहे। सबसे पहले उन्होंन खुदा की शान में नात ए हम्द पढ़ी। इसी दौरान नवी के मर्तबा को बताते हुये नाते पाक पढ़ी। नात ऐ पाक अल्लाहू-अल्लाहू, जब हरम से अजा। की सदा आ गई तो रूह ऐ ईमान को ताजगी मिल गई, तेरे बन्दे चले करने को बन्दगी पंजगाना अदा करने को ऐ खुदा पहुंचे मस्जिद बजू, अल्लाहू-अल्लाहू पढ़े।

इसके बाद नात ए पाक पढऩे का सिलसला शुरू हुआ। उन्होंने नवी का मर्तबा पढ़कर सुनाया, या रसूलुल्लाह या हबीब अल्लाह, मरने के बाद जन्नत उसी को नसीब होगी जो लोग पढ़ रहे हैं कलमा मेरे नवी का मेरे नवी का वल्लाह जलवा क्या हसीं है मेरे नवी का, या रसूलुल्लाह या हबीब अल्लाह। फिर दौर चला मनकवत का कब्बाल शाकिब अली ने हजरत अली मुर्तुजा, ख्वाजा गरीब नवाज और सदनशाह बाबा कि शान में पढ़ा, मेरे अंगना मुईनुद्दीन आये हैं आज बाबा सदनशाह दूल्हा बने हैं बने हैं। बरसते हैं रंग हसनी हुसैनी सदनशाह बाबाके आँगन में, मेरे अँगना मुइनुद्दीन आये हैं। इसके बाद उन्होंने जैसे ही बाबा सदन की शान में पढ़ा- मुुझको मोहताज किसी का नहीँ होने देंगे सदनशाह बाबा, लाज रख लेते हैं हर एक जगह पर मेरी सदनशाह बाबा, मिटाने वाले तो कब का मिटा देते, बचाने वाले साथ साथ रहते हैं। लाज रख लेते हैं मेरे सदनशाह बाबा, जिसको श्रोताओं ने मंत्रमुग्ध होकर सुना और बाबा की शान में नारे लगाने शुरु कर दिये और नोट की बारिश कर दी। कव्वालियों का सिलसिला सुबह चार बजे तक चलता रहा। आखिर में गजल चला। मंच का संचालन प्रेस क्लब के पूर्व महमंत्री मोहम्मद नसीम और शकीर अली व अरमान कुरैशी ने सयुंक्त रूप से किया। उर्स के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम रहे चप्पे चप्पे पर जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन की निगरानी रही। आभार नायाब सदर अब्दुल रहमान कल्ला ने किया।
आज होंगी इज्तिमाई शादियां
उर्स कमेटी द्वारा आज चार अप्रैल को इज्तिमाई शादियां सम्पन्न कराई जाएंगी, जिसमें 23 जोड़ों के निकाह होंगे। जिले के आलावा अन्य राज्यों की बेटियों के के निकाह कराये जाते हैं।
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