Tuesday, March 10, 2026
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“अभी तो सिर्फ बॉर्डर लाइन शुगर है”- क्या आपकी यही सोच हार्ट अटैक और स्ट्रोक को दावत दे रही है?

बहुत से लोग प्री-डायबिटीज को नजरअंदाज करते हैं, लेकिन यह दिल की बीमारियों और स्ट्रोक का बड़ा जोखिम है।

बहुत से लोग ‘प्री-डायबिटीज’ को यह सोचकर नजरअंदाज कर देते हैं कि यह “अभी तक पूरी तरह से डायबिटीज नहीं है।” उन्हें लगता है कि यह कोई नुकसानदेह स्थिति नहीं है, लेकिन सच इससे बिल्कुल उलट है। अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमारने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि हमारी ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचना डायबिटीज होने से बहुत पहले ही शुरू हो जाता है। आइए, डिटेल में समझते हैं इस बारे में।

क्यों खतरनाक है प्री-डायबिटीज?

प्री-डायबिटीज अपने आप में दिल की बीमारियों के जोखिम को काफी बढ़ा देता है। अध्ययनों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं:

  • जिन युवा वयस्कों को प्री-डायबिटीज है, उनमें सामान्य ब्लड शुगर वालों की तुलना में हार्ट अटैक का खतरा लगभग 1.7 गुना अधिक होता है।
  • अगर इसके साथ धूम्रपान जैसी अन्य आदतें भी जुड़ जाएं, तो युवाओं में स्ट्रोक का खतरा तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ सकता है।
  • इसके अलावा, प्री-डायबिटीज अक्सर मोटापे और हाई कोलेस्ट्रॉल के साथ शरीर में आता है। ये दोनों ही नसों की बीमारियों को तेजी से बढ़ाने का काम करते हैं।

इन बातों का सीधा सा मतलब यह है कि दिल की बीमारियां, डायबिटीज की आधिकारिक पहचान होने से कई साल पहले ही शरीर में पनपने लगती हैं।

मोटापे का होता है ‘डबल अटैक’

जब प्री-डायबिटीज के साथ मोटापा भी जुड़ जाता है, तो स्थिति कई गुना गंभीर हो जाती है। मोटापा कई अलग-अलग तरीकों से इस खतरे को बढ़ाता है:

  • यह शरीर में इंसुलिन के प्रति रुकावट पैदा करता है।
  • शरीर में लगातार एक हल्की सूजन बनी रहती है।
  • यह नसों के अंदरूनी कामकाज को बुरी तरह प्रभावित करता है।
  • यह धमनियों के सख्त होने की प्रक्रिया को बहुत तेज कर देता है।
  • इन सभी कारणों के एक साथ मिलने से हमारी नसें समय से पहले ही बूढ़ी और कमजोर होने लगती हैं।

युवाओं के लिए खास चेतावनी

सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह अब सिर्फ बुजुर्गों की समस्या नहीं रही है। 45 वर्ष से कम उम्र के युवाओं में भी हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके पीछे का मुख्य कारण मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसे मेटाबॉलिक रिस्क फैक्टर्स ही हैं।

इसलिए, सबसे जरूरी बात जो हमें समझनी चाहिए वह यह है कि प्री-डायबिटीज को कभी भी हल्के में लेने की भूल नहीं करनी चाहिए। इसे दिल की बीमारियों के लिए शरीर का एक ‘शुरुआती चेतावनी संकेत’ समझना ज्यादा सही होगा।

हालांकि, घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि प्री-डायबिटीज की स्थिति को वापस सामान्य किया जा सकता है। डॉ. सुधीर का कहना है कि वजन कम करके, रेगुलर एक्सरसाइज और एक हेल्दी अपनाकर आप न सिर्फ अपने ब्लड शुगर को फिर से नॉर्मल कर सकते हैं, बल्कि भविष्य में होने वाली दिल की बीमारियों के खतरे को भी काफी हद तक टाल सकते हैं।

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