बांसी सिद्धार्थनगर। कृषि प्रधान देश में शासन प्रशासन की गलत नीतियों के चलते सबसे ज्यादा परेशान किसान ही है समय से खाद बीज के कृत्रिम अभाव बताकर किसानों का शोषण आम बात हो गया है बताते चलें पहले तो जिम्मेदार उर्वरक का अभाव बताते हैं फिर ऊंचे दर पर लूट मचाते हैं जिससे किसानों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समित तिलौला मे उर्वरक की कालाबाजारी किसानों के लिए सर दर्द बन गया है।
अभाव या ऊंचा दर पर उर्वरक लेना किसने की मजबूरी बनती जा रही है बताया जा रहा है कि शासन से डीएपी का प्रति बैग रेट 1350 है लेकिन वितरण कार्य में लगे लोग ऊंचे दर पर बेच रहे हैं यदि कोई विरोध कर रहा है तो उसके लिए उर्वरक नहीं है कह कर जिम्मेदार अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं बुधवार को उक्त केंद्र से ऊंचे दर पर बेचे जा रहे हैं उर्वरक को लेकर लोगों ने विरोध भी जताया है लेकिन जिम्मेदार प्रशासन पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है यह केवल उक्त केंद्र की बात ही नहीं है लगभग सभी केंद्रों पर किसानों के साथ ऐसा ही बर्ताव किया जा रहा है।
तमाम किसानों ने कमरे पर आरोप लगाते हुए कहा कि ₹1400 में डीएपी खाद मिल रहा है। उपजिलाधिकारी निखिल चक्रवर्ती से इस संबंध में पूछने पर उन्होंने कहा कि कल मै समिति पर जाकर देख कर बताता हूं। इस मामले में जिला कृषि अधिकारी से संपर्क करनी चाहिए पर मोबाइल उनकी स्विच ऑफ मिला।





