Tuesday, March 3, 2026
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बिजली निजीकरण के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की तैयारी: 27 लाख कर्मी देंगे सरकार को चेतावनी

उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया के विरोध में देशभर के 27 लाख बिजली कर्मी एक बड़े आंदोलन की तैयारी में हैं। नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स (NCCOEEE) ने आज दिल्ली में हुई अपनी राष्ट्रीय कोर कमेटी की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। संगठन ने चेतावनी दी है कि उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण का टेंडर जारी होते ही पूरे देश के बिजली कर्मी एक दिन की सांकेतिक हड़ताल करेंगे।

NCCOEEE ने यह भी घोषणा की है कि आगामी 02 जुलाई को उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों के समर्थन में पूरे देश के सभी जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा, आगामी 09 जुलाई को उत्तर प्रदेश में चल रहे बिजली के निजीकरण के विरोध में देशभर के तमाम बिजली कर्मी राष्ट्रव्यापी हड़ताल करेंगे।

कमेटी ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने और किसानों, आम घरेलू उपभोक्ताओं और गरीब उपभोक्ताओं के व्यापक हित में उत्तर प्रदेश में चल रही बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की है।

इस आंदोलन में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन, ऑल इंडिया पावर डिप्लोमा इंजीनियर्स फेडरेशन, ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज, इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया पावर मेंस फेडरेशन और तमिलनाडु इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड इंप्लाइज फेडरेशन सहित कई प्रमुख संगठन शामिल हैं। बैठक में शैलेंद्र दुबे, अभिमन्यु धनकड़, मोहन शर्मा, सुदीप दत्ता, आर के शर्मा, ए सेकीजार, सुभाष लांबा, ए के जैन, यशपाल शर्मा और सत्यपाल सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे।

आगामी 22 जून को लखनऊ में किसानों, आम घरेलू उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों की एक महापंचायत का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कोऑर्डिनेशन कमेटी के राष्ट्रीय पदाधिकारी सम्मिलित होंगे। इस महापंचायत में बिजली के निजीकरण के विरोध में एक निर्णायक जन आंदोलन का फैसला लिया जाएगा।

NCCOEEE ने उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों द्वारा पिछले 194 दिनों से लगातार चलाए जा रहे आंदोलन की सराहना की और पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं के दमन की कड़ी निंदा की। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि बिजली कर्मियों का दमन नहीं रुका, तो देश के तमाम 27 लाख बिजली कर्मी मूक दर्शक नहीं रहेंगे और लोकतांत्रिक ढंग से इसके विरोध में आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी सारी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार की होगी।

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