कप्तान से शिकायत, दिए जांच के आदेश
बाराबंकी। जनपद बाराबंकी के मसौली थाना क्षेत्र से कानून-व्यवस्था को शर्मसार करने वाला गंभीर मामला सामने आया है, जहां दबंग अभियुक्तों और स्थानीय पुलिस चौकी की कथित मिलीभगत पर सवाल खड़े हो गए हैं। रंगदारी और जानलेवा हमले के मुकदमे में नामजद अभियुक्तों को विवेचना से बाहर करने की कोशिशों ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। मुकदमा अपराध संख्या 485/2025, धारा 3(5), 115(2), 352, 351(3) बीएनएस के तहत दर्ज इस मामले में कुल छह अभियुक्त नामजद हैं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि विवेचना के दौरान प्रभावशाली दबंगों के नाम हटाने की “डील” चल रही है, जिससे न्याय की हत्या की जा रही है।
घटना 27 दिसंबर 2025 की रात करीब 9:30 बजे की है, जब मेले से लौट रहे दो युवक—मोहम्मद तौसीफ (18) और मोहम्मद सूफियान (21)—को गांव के ही दबंगों ने रास्ते में घेर लिया। रंगदारी की मांग, अश्लील गालियां और विरोध करने पर लोहे की रॉड व लाठियों से जानलेवा हमला कर दोनों को लहूलुहान कर दिया गया। साथ ही धमकी दी गई कि पुलिस या कहीं शिकायत की तो जान से मार देंगे। पीड़ितों का आरोप है कि अभियुक्त आदतन अपराधी हैं और उनके खिलाफ पूर्व से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। बावजूद इसके, वे खुलेआम दावा कर रहे हैं कि “चौकी पर वही होगा जो हम चाहेंगे” और चौकी इंचार्ज से नजदीकी का रौब दिखाकर पीड़ितों को डरा-धमका रहे हैं। गांव में यह चर्चा आम है कि अभियुक्त दिन-रात चौकी पर बैठते हैं, जिससे आम जनता में भय और असुरक्षा का माहौल है।
सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि चार नाम मुकदमे से निकालने की बातचीत फाइनल बताई जा रही है। यदि ऐसा हुआ तो यह न सिर्फ पीड़ितों के साथ अन्याय होगा, बल्कि अपराधियों के हौसले और बुलंद होंगे और कानून का भय पूरी तरह खत्म हो जाएगा। पीड़ित पक्ष ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष व पारदर्शी विवेचना, अभियुक्तों का आपराधिक इतिहास तलब करने, विवेचना किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराने और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। अब देखना यह है कि क्या पुलिस महकमा आरोपों की निष्पक्ष जांच कर भरोसा बहाल करेगा या फिर दबंगों की हुकूमत यूं ही चलती रहेगी।





