Friday, April 3, 2026
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दुधवा नेशनल पार्क में अब जंगली जल भैंस का भी होगा पुनर्वास, चल रही तैयारी

प्रदेश सरकार दुधवा नेशनल पार्क में लुप्तप्राय जंगली जल भैंसों को फिर से बसाने की तैयारी कर रही है। भारतीय वन्यजीव संस्थान उपयुक्त आवास के लिए अध्ययन कर रहा है। रिपोर्ट के बाद असम से भैंसों का समूह लाया जाएगा।

लखनऊ। प्रदेश सरकार लुप्त हो चुके जंगली जल भैंस (वाइल्ड वाटर बफेलो) को दुधवा नेशनल पार्क में बसाने जा रही है। इसके लिए वन विभाग, भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून से उपयुक्त आवास का चयन करने के लिए अध्ययन करा रहा है। दुधवा इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां घास के मैदानों की गुणवत्ता, जल स्रोतों की उपलब्धता व कम मानवीय हस्तक्षेप है।

संस्थान की रिपोर्ट के बाद वन विभाग असम से जल भैंसों का समूह यहां लाकर बसाएगा। जंगली जल भैंस मुख्य रूप से दलदल, जंगल और पानी के पास घास के मैदानों में रहना पसंद करते हैं। जंगली जल भैंस की वापसी से राज्य की जैव विविधता को नई मजबूती मिलेगी।

यह पहल न केवल एक लुप्तप्राय प्रजाति के संरक्षण की दिशा में अहम कदम है, बल्कि वन पारिस्थितिकी तंत्र को भी सशक्त बनाएगी। जंगली जल भैंस का शरीर बेहद भारी और मांसल होता है। नर का वजन करीब एक हजार किलो तक होता है। इनकी सबसे खास पहचान इनके लंबे, घुमावदार और बाहर की ओर फैले सींग होते हैं, जो करीब दो मीटर तक फैल सकते हैं।

यह आमतौर पर शांत रहते हैं लेकिन खतरा महसूस होने पर बेहद आक्रामक हो जाते हैं। ये शाकाहारी होते हैं और घास, जलीय पौधे व अन्य वनस्पतियां खाते हैं। देश में इन्हें बचाने के लिए असम के काजीरंगा नेशनल पार्क और छत्तीसगढ़ के इंद्रावती नेशनल पार्क में पहले से प्रयास किए जा रहे हैं।

गैंडे का भी यहां हो चुका है सफल पुनर्वास

दुधवा में 1984 में गैंडा पुनर्वासन कार्यक्रम शुरू किया गया था। उस समय असम से पांच गैंडे दुधवा लाए गए थे। 1985 में नेपाल से चार मादा गैंडे लाए गए। गैंडा पुनर्वास योजना की सफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां पर वर्ष 2018 में हुई डीएनए आधारित गणना में 38 गैंडे मिले थे। वर्तमान में इनकी संख्या लगभग 50 हो गई है।

“जंगली जल भैंस संकटग्रस्त प्रजाति है, इसे दुधवा नेशनल पार्क में बसाने की योजना है। इसके लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून से अध्ययन कराया जा रहा है। स्थान चिह्नित होने के बाद पार्क में इनके पुनर्वास के लिए तैयारियां शुरू कर दी जाएंगी। इनके लिए विशेष तरह की फेसिंग भी की जाएगी ताकि इन्हें यहां सुरक्षित रखा जा सके।
-अनुराधा वेमूरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव

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