उत्तर बंगाल के इलाके में कल-कारखानों का अभाव है। इस क्षेत्र में कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, दार्जिलिंग, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मालदा और कूचबिहार कुल आठ जिले हैं। यह पूरा क्षेत्र काफी समय से औद्योगिक पिछड़ेपन का शिकार है।
उत्तर बंगाल के इलाके में कल-कारखानों का अभाव है। इस क्षेत्र में कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, दार्जिलिंग, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मालदा और कूचबिहार कुल आठ जिले हैं। यह पूरा क्षेत्र काफी समय से औद्योगिक पिछड़ेपन का शिकार है।
पूरे आठ जिलों को मिला दें तो आठ भी ऐसे कल कारखाने नहीं है, जहां 100 से अधिक लोगों को रोजगार मिला हो। उद्योग के नाम पर छोटी-मोटी इकाइयां हैं, जो स्थानीय युवाओं की रोजगार की आवश्यकता को पूरी करने में सक्षम नहीं हैं।
पिछले 34 वर्षों के वाम मोर्चा शासन और अब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के करीब 15 वर्षों के शासनकाल में उत्तर बंगाल में कोई बड़ा औद्योगिक निवेश नहीं हुआ है।
राज्य सरकार हर साल बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट आयोजित करती है, जिनमें सैकड़ों करोड़ के निवेश प्रस्तावों की घोषणा होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उत्तर बंगाल में इनका असर नहीं के बराबर है।
ज्यादातर निवेश दक्षिण बंगाल या कोलकाता क्षेत्र में ही सीमित है। इस औद्योगिक शून्यता के कारण उत्तर बंगाल के युवा बड़े पैमाने पर पलायन कर रहे हैं। इनके पलायन को रोकना यहां सबसे बड़ी चुनौती है।
कूचबिहार से मालदा तक हर जिले के युवा रोजगार की तलाश में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों में जा रहे हैं। हाल के दिनों में कई राज्यों में बांग्लाभाषी मजदूरों को ”बांग्लादेशी” बताकर मारपीट की घटनाएं हुईं। इस तरह की घटना के शिकार उत्तर बंगाल के युवा भी हुए हैं।
1500 का भत्ता नहीं स्थायी रोजगार चाहिए
राज्य सरकार ने बेरोजगार युवाओं के लिए बांग्लार युवा साथी योजना शुरू की है। इसके तहत 21-40 वर्ष के युवाओं को 1500 रुपये मासिक भत्ता दिया जा रहा है। युवाओं को अधिकतम पांच वर्ष तक या नौकरी मिलने तक इसका लाभ मिलने का प्रावधान है।
लाखों युवाओं ने इसके लिए आवेदन किया है। विपक्षी दल और राज्य के युवा इसे चुनावी चाल बता रहे हैं। युवा कहते हैं कि उन्हें 1500 का लालीपाप नहीं, बल्कि सम्मानजनक रोजगार चाहिए। अगर बंगाल में ही अच्छी नौकरियां मिलतीं तो दूसरे राज्यों में जाने की मजबूरी नहीं होती।
भाजपा ने बनाया बड़ा मुद्दा
इस बार चुनाव में भाजपा ने उत्तर बंगाल के औद्योगिक पिछड़ेपन को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया है। वह काफी हद तक बेरोजगार युवाओं को यह बताने में कामयाब रही है कि उन्हें 1500 रुपये नहीं, बल्कि स्थायी रोजगार की जरूरत है। भाजपा नेता तथा केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि बंगाल में औद्योगिकीकरण खत्म हो चुका है। इसी कारण युवा पलायन कर रहे हैं।
तृणमूल को है खतरे का अहसास
उत्तर बंगाल में पर्यटन से कुछ रोजगार मिलता है। खासकर दार्जिलिंग और डुवार्स के क्षेत्र में। हालांकि इसमें भी संभावनाएं सीमित हैं। उधर, डुवार्स में चाय उद्योग संकट में है। कई बागान बंद हो चुके हैं। रोजगार की कमी और पलायन एक बड़ा चुनावी मुद्दा हो सकता है, इसका अहसास तृणमूल कांग्रेस को भी है।





