केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में राहुल गांधी द्वारा ‘एप्स्टीन फाइल्स’ का मुद्दा उठाने के बाद स्पष्टीकरण दिया है। पुरी ने कहा कि उनकी जेफरी एप्स्टीन से केवल तीन-चार पेशेवर और आधिकारिक मुलाकातें हुई थीं, जब वे संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि थे। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए किसी भी अवैध गतिविधि से संबंध से इनकार किया।
लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा ‘एप्स्टीन फाइल्स’ का मुद्दा उठाए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि उनकी एप्स्टीन से केवल तीन-चार मुलाकातें हुई थीं और वे भी पूरी तरह पेशेवर तथा आधिकारिक प्रकृति की थीं।
अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए पुरी ने कहा कि उनका किसी भी अवैध गतिविधि से कोई संबंध नहीं है। राहुल गांधी ने अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेजों का हवाला देते हुए लोकसभा में दावा किया था कि जेफरी एप्स्टीन से जुड़े दस्तावेजों में हरदीप सिंह पुरी का नाम भी है।
एप्स्टीन फाइल में दुनियाभर के कई लोगों के नाम
एप्स्टीन की मृत्यु के बाद जारी दस्तावेजों में दुनिया भर के कई राजनेताओं, उद्योगपतियों और प्रतिष्ठित व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं, जो कभी न कभी उसके संपर्क में रहे थे।राहुल के आरोपों के बाद हरदीप पुरी ने प्रेस कान्फ्रेंस कर सफाई दी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 में जब वे न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि (राजदूत) थे और बाद में इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (आईपीआई) से जुड़े थे तो उसी दौरान वे एक प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में एप्स्टीन से मिले थे। ये मुलाकातें इंडिपेंडेंट कमीशन आन मल्टीलेटरलिज्म और संयुक्त राष्ट्र की 75वीं वर्षगांठ से जुड़े विमर्श के संदर्भ में थीं।
पुरी ने स्पष्ट किया कि 2009 से 2017 के बीच शिष्टमंडल के रूप में तीन या चार औपचारिक बैठकें हुईं। आईपीआई में उनके वरिष्ठ टेरजे राड-लार्सन एप्स्टीन को जानते थे और संस्थागत स्तर पर बातचीत होती थी। इन बैठकों का पूरा रिकार्ड सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है।
एप्स्टीन पर क्या-क्या आरोप लगे?
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अमेरिकी न्याय विभाग ने 30 लाख से अधिक दस्तावेज और ईमेल सार्वजनिक किए हैं, जिनमें इन बैठकों का उल्लेख है। ऐसे में सभी जानकारियां अब आम लोगों के सामने हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि एप्स्टीन के खिलाफ जो आरोप लगे थे, वे नाबालिगों के यौन शोषण, मानव तस्करी और सेक्स ट्रैफिकिंग से जुड़े थे। इन आरोपों का उनकी आधिकारिक बैठकों से कोई लेना-देना नहीं है। एपस्टीन पर लगे आरोपों का उनकी औपचारिक बातचीत से कोई संबंध नहीं जोड़ा जा सकता।





