Thursday, March 19, 2026
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HomeMarqueeनूतन वर्ष का कवि सम्मेलन से हुआ अभिनंदन

नूतन वर्ष का कवि सम्मेलन से हुआ अभिनंदन

अवधनामा संवाददाता

विधायक हरि प्रकाश वर्मा ने किया कार्यक्रम का शुभारंभ

साहित्य साधना मंच ने किया कवियों का सम्मान

शाहजहांपुर नववर्ष 2023 के उपलक्ष्य में साहित्य साधना मंच की ओर से कलान क्षेत्र के नरसुइया गांव में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय हरिप्रकाश वर्मा (विधायक -जलालाबाद)तथा विशिष्ट अतिथि विनोद गुप्ता (अध्यक्ष, भूमि विकास बैंक कलान)ने कार्यक्रम का शुभारंभ माता सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलित किया।इस अवसर पर मुख्य अतिथि और जलालाबाद विधायक हरि प्रकाश वर्मा का स्मृति चिह्न देकर और अंगवस्त्रम् ओढ़ाकर ज़ोरदार अभिनंदन किया गया।इसके उपरांत पीलीभीत से पधारे जीतेश राज़ “नक्श ” और राष्ट्रवादी कवि प्रदीप वैरागी को अंगवस्त्रम् ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न देकर विशेष अविस्मरणीय सारस्वत अभिनंदन किया गया।
साहित्य साधना मंच के संरक्षक श्यामपाल शास्त्री (पूर्व प्रधानाचार्य, सेठ गयादीन संस्कृत महाविद्यालय गुंदौरा दाउदपुर)और कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री रामसहाय मेमोरियल इंटर कालेज, नरसुइया के प्रधानाचार्य बीके शर्मा ने सभी अथितिगणों को शाल ओढ़ाकर और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया।
सुप्रसिद्ध ओज कवि एवं मंच संचालक उर्मिलेश सौमित्र के कुशल संचालन में पीलीभीत से आए देश के ख्यातिलब्ध शायर जीतेश राज ‘नक्श’ ने बेहतरीन ग़ज़लें और गीत पढ़ते हुए कहा-
कुछ कदम और यहीं आस पास है मंजिल।
रोज मुझसे मेरे पैरों का सफर बोलता है।
और पुवायां से पधारे प्रसिद्ध कवि प्रदीप वैरागी ने शानदार काव्य पाठ करते हुए कहा कि,
हर तरफ़ हो प्रेम की सुगंध केवल,
नफ़रत की उड़ती हुई कहीं धूल न हो!
हमारे प्रेम की खुश्बू न मिली हो जिसमें,
इस चमन में ऐसा कोई फूल न हो।।
आमंत्रित हास्य कवि कुलदीप शुक्ला ने कहा –
जय कलयुग की घरवाली
पतियों को देती गाली।।
पति उतारे डर में आरती,
जय देवी झाड़ू बेलन से तुम हो मारती।।
हास्य कवि उमेश कुमार शाक्य ने सबको हंसाते हुए कहा कि _
कसे जो तंज बीबी पर,नहीं वह बुद्धिजीवी है।
ब्याह होकर मिली कैसे, समझिए खुशनसीबी है।
तरसते लोग पाने को, मगर सबको नहीं मिलती,
किसी रंडुए से जा पूछो, भला क्या चीज बीबी है।।
हास्य कवि चंद्रप्रकाश शर्मा ने श्रोताओं को गुदगुदाया कि,
बिना शम्मा के परवाना कोई भी जल नहीं सकता।
बिना जिसके कभी इक रोज भी घर चल नहीं सकता।
भले एक बार को आदेश टल जाए अदालत का,
मगर आदेश पत्नी का कभी भी टल नहीं सकता।।
साहित्य साधना मंच के निदेशक कुमार रजनीश ने ग़ज़ल गुनगुनाते हुए कहा-
इक तरीका है ये भी प्यार जताने के लिए।
रूठ जाता है वो बस मेरे मनाने के लिए।।
कवि रामू सिंह ने ग़ज़ल सुनाते हुए कहा_
काम ये सबको यहां करके दिखाना होगा।
जो मिला है यहां किरदार निभाना होगा।।
ओजकवि विवेक मौर्य ने हुंकार भरते हुए कहा _
जो भी जिस भाषा में समझे ,उसमें समझाना पड़ता है।
अधिकार कहां मांगे मिलता ,अधिकार कमाना पड़ता है। कवि नवनीत कुमार ने शानदार मुक्तक सुनाते हुए कहा कि
दुनिया की ये झूठी सारी माया है।
संकट में कब किसने साथ निभाया है।
वो होते हैं किस्मत वाले इस जग में,
जिनके सर पर मात पिता का साया है।।
इस अवसर पर तमाम सुधी श्रोता उपस्थित रहे।
अंत में कार्यक्रम संयोजक कवि उर्मिलेश सौमित्र और साहित्य साधना मंच के निदेशक कवि कुमार रजनीश ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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