पिछड़ता सा नज़र आ रहा है नगर पंचायत बरबर

अवधनामा संवाददाता मोहम्मदी-खीरी (Mohammadi-kheri.)। जिले के कस्बा बरबर को कहने को तो नगर पंचायत का तमंगा प्राप्त है लेकिन नगर पंचायत जैसी सुविधाए उपलव्ध न होने के कारण मूलभूत सुविधाओ से वंचित है। चाहे शिक्षा की बात की जाए चाहे स्वास्थ्य व्यवस्था की बात, चाहे सफाई व्यवस्था हो हर प्रकार से बरबर नगर पंचायत पिछड़ता
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अवधनामा संवाददाता

मोहम्मदी-खीरी (Mohammadi-kheri.)। जिले के कस्बा बरबर को कहने को तो नगर पंचायत का तमंगा प्राप्त है लेकिन नगर पंचायत जैसी सुविधाए उपलव्ध न होने के कारण मूलभूत सुविधाओ से वंचित है। चाहे शिक्षा की बात की जाए चाहे स्वास्थ्य व्यवस्था की बात, चाहे सफाई व्यवस्था हो हर प्रकार से बरबर नगर पंचायत पिछड़ता नज़र आ रहा है परन्तु किसी भी जनप्रतिनिधि व अधिकारियो के कानो पर जू नहीं रेंग रही। नगर पंचायत बरबर की आबादी लगभग 50 हजार होने के कारद भी बरबर में स्वास्थ्य केन्द्र के नाम पर सिर्फ एक स्वास्थ्य केन्द्र है जहां पर मरीजो के इलाज की समुचित व्यवस्था भी नहीं है अगर कोई मरीज अस्पताल आ भी जाता है तो उसे हरी-पीली गोलियां देकर चलता कर दिया जाता है। यदि कोई गम्भीर मरीज हो तो उसे पसगवां या मोहम्मदी ले जाया जाता है। यही नहीं स्वास्थ्य केन्द्र बरबर भीषण गन्दगी की चपेट में समाया हुआ है जिसकी सफाई व्यवस्था की भी किसी को चिन्ता नहीं है। शिक्षा के नाम पर बरबर कस्बे में सरकारी विद्यालय के नाम पर मात्र कक्षा आठ तक की ही शिक्षा ग्रहण करने की व्यवस्था है बाकी शिक्षा के नाम पर सिर्फ दुकाने खुली है जहां अभिभावको से मनमानी फीस वसूली जाती है। जिस कारण गरीब तबके के लोग अपने बच्चो का उक्त विद्यालयो मे दाखिला नहीं करा पाते है। बरबर कस्बे के मोहल्ला विजय नगर में कभी एक कन्या पाठशाला हुआ करता था जो आज पूरी तरह खण्डहरो में तबदील हो शराबी और जुआरियो का अडडा बन चुका है। कस्बे के कुछ संभ्रान्त व्यक्तियो का कहना है कि अगर उस पर दो मन्जिला इमारत बनाकर तैयार कर ली जाए तो कन्याओं के लिए बालिका इण्टिर कालेज बन सकता है जिससे बालिकाओ के लिए इण्टर तक की शिक्षा प्राप्त करने की व्यवस्था हो सकती है। नगर पंचायत बरबर लगभग 50 हजार की आबादी होने के बाद भी बरबर कस्बे मे कोतवाली होने के बजाए सिर्फ पुलिस चैकी ही है जिस कारण कस्बेवासियो को एफआईआर दर्ज कराने के लिए 20 किलोमीटर दूर पसगवंा जाना पड़ता है। बरबर कस्बे के निवासी व कौमी एकता कमेटी के अध्यक्ष बायो वृद्ध मुंशी अब्दुल जलील खान ने कई बार बरबर कस्बे में कोतवाली बनाने के लिए उच्चाधिकारियो से लेकर शासन-प्रशासन तक कई प्रार्थना पत्र एवं ज्ञापन दिए व धरना प्रदर्शन भी किए लेकिन कस्बे में आज तक थाना नही बन सका। बरबर कस्बे को नगर पंचायत का तमगा होने के बाद भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। बरबर कस्बे में सफाई व्यवस्था की बात की जाए तो सफाई के नाम पर सिर्फ कागजो में ही खाना पूरी होती रहती है सड़को नालियो को देखा जाए तो हकीकत समाने आ जाती है। बरबर कस्बे में गन्दगी से सुरक्षित न तो शिक्षण संस्थान है और न ही धार्मिक स्थल और न स्वास्थ्य केन्द्र। कस्बे के चारो ओर गन्दगी का अम्बार लगा हुआ है। डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, चिकनगुनिया जैसी खतरनाक बीमारियों का खतरा नगर वासियो पर हमेशा मडराता रहता है लेकिन गूंगी बहरी नगर पंचायत बरबर अपनी आंखो पर पटटी बांध रखी है। इतना कुछ होने के बाद भी जनप्रतिनिधि व अधिकारी बरबर की ओर ध्यान क्यो नहीं देते हैं। चुनाव के समय सभी नेतागण आते है और वादो की लालीपाल जनता को थमा कर वोट तो हासिल कर लेते है कही अस्पताल के नाम पर तो कही डिग्री कालेज खुलवाने के नाम पर। वोट मिलने के बाद माननीय पांच वर्ष तक पटल कर बरबर की जनता का हाल जानना भी गवारा नहीं करते।