मौदहा (हमीरपुर)। कस्बे में चल रहे विकास कार्य अब जनता के लिए सुविधा नहीं बल्कि भ्रष्टाचार का उदाहरण बनते जा रहे हैं। नगरपालिका द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन की जमकर बंदरबांट की जा रही है, जबकि निर्माण की गुणवत्ता पूरी तरह से सवालों के घेरे में है।
फत्तेपुर मोहल्ले में बन रहे नाले के निर्माण में प्रतिबंधित डस्ट का खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है। यही नहीं, इस निर्माण कार्य में बाल मजदूरों से काम कराया जा रहा है, जो कानूनन गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। हैरानी की बात यह है कि काम कर रहे अधिकांश बाल मजदूरों के आधार कार्ड में जन्मतिथि एक जनवरी दर्ज है, जिससे उम्र में हेराफेरी की आशंका और गहरी हो गई है।
लगभग एक पखवाड़ा बीत जाने के बावजूद नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों की इस ओर कोई नजर नहीं पड़ी, जिससे उनकी भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। वहीं ठेकेदार का दावा है कि कार्य योजना में डस्ट का प्रावधान है, जो साफ तौर पर नियमों और मानकों की अनदेखी को दर्शाता है।
घटिया निर्माण को लेकर मोहल्ले के लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस तरह के निर्माण कार्यों की पोल अक्सर छह महीने के भीतर ही खुल जाती है, लेकिन तब तक सरकारी धन ठिकाने लग चुका होता है। लोगों ने जल्द ही उच्च अधिकारियों से शिकायत करने की चेतावनी दी है।
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले कोतवाली के पीछे बनी सड़क में भी बड़े भ्रष्टाचार की पोल खुल चुकी है, बावजूद इसके जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि गुणवत्ता की बजाय मोटे कमीशन की होड़ में निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, नगरपालिका द्वारा कराए गए अधिकांश विकास कार्य अब सवालों के घेरे में आ चुके हैं। जनता यह जानना चाहती है कि क्या इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।





