किलोमंजारो चोटी पर तिरंगा फहराने की तैयारियों में जूटा पर्वतारोही अब्दुल रहमान

अफ्रीका के तंजानिया शहर में स्थित है सबसे बड़ी चोटी है किलोमंजारो

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किलोमंजारो चोटी पर तिरंगा फहराने की तैयारियों में जूटा पर्वतारोही अब्दुल रहमान

अवधनामा संवाददाता (शकील अहमद)

कुशीनगर। जिले का एक मात्र पर्वतारोही अब्दुल रहमान अब देश के साथ ही विदेशों में भी अपनी कूबत का लोहा मनवाने के लिए एड़ी से चोटी लगा दिया है। अफ्रीका देश की सबसे ऊंची चोटी किलोमंजारो को फतह करने के लिए पर्वतारोही अब्दुल रहमान खून-पसीना बहा रहा है। वह अटल बिहारी वाजपेयी माउंटेनरिंग संस्था मनाली के बैनर तले प्रशिक्षण ले रहा है, अक्टूबर या नवम्बर माह में कभी भी अफ्रीका जा सकता है। 

बता दें कि विकास खंड मोतीचक के गांव लक्ष्मीपुर निवासी मो0 ईशा का बेटा अब्दुल रहमान वर्ष 2012 से अलीगढ़ मुस्लिम विश्व विद्यालय में पढाई के दौरान पर्वतारोही के क्षेत्र आकर्षित हुआ। धीरे-धीरे पर्वतारोही के क्षेत्र में  हिस्सा लेने लगा। अन्ततः संघर्ष किया और अपने लक्ष्य को पाया। इसके मेहनत व लगन को देखते हुए 2016 में अलीगढ़ विश्वविद्यालय के माउंटेनरिंग क्लब (पर्वतरोही दल) के कप्तान से नवाजा गया था। जिम्मेदारी संभालते हुए अब्दुल रहमान अपने टीम को विभिन्न पर्वतों पर साथ लेकर चढ़ा जहां हर बार अव्वल रहा। पिछले वर्ष 2019 में अटल बिहारी वाजपेयी माउंट ट्रेनिंग क्लब मनाली हिमांचल प्रदेश के तत्वाधान में एक्सीपीडेशन लीड करते हुए 17553 फीट ऊंची चोटी "फ्रेंडशीप" पर चढ़कर तिरंगा फहरा था इसके अलावा 11 जुलाई 2021 को हिमाचल प्रदेश के युनम चोटी (20 हजार फीट) पर तिरंगा फहराकर जिले व प्रदेश का नाम रोशन किया। पर्वतारोही अब्दुल रहमान बताया कि अब मैं अफ्रीका देश के तंजानिया शहर में स्थित सबसे बड़ी चोटी किलोमंजारों को फतहकर देश का नाम रोशन करना चाह रहा हूँ।इसके लिए मैं पूरी तरह से तैयारियों में जुट गया हूँ। 

पर्वतारोही अब्दुल रहमान की उपब्ध

पर्वतारोही अब्दुल रहमान इसके पूर्व  2012 से लेकर अब तक कई बार 15-20 हजार फीट तक उंची चोटी पर कई बार चढ़कर टीम का नाम रोशन करता रहा हौ। नौ वर्षो में अब्दुल रहमान कई बार प्रथम स्थान पर रहा जिसपर भारत देश के कई स्थानों जैसे अलीगढ़, मनाली, राजस्थान, काश्मीर के पर्वतरोही संस्था द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। 

एवरेस्ट पर चढ़ने का भी रखता है लक्ष्य

अब्दुल रहमान शुरू से ही जुझारू किस्म का व्यक्ति रहा है। अपने संघर्षो के बदौलत आज ऊंची से ऊंची चोटी छुने से गुरेज नही करता है। अब्दुल रहमान का कहना है कि नौ वर्षो से पर्वतरोही के क्षेत्र में मेरा प्रयास लगातार जारी रहा है और आखिरी सांस तक जारी रहेगा। किलोमन्जारो फतह करने के बाद मिशन एवरेस्ट चोटी पर जाने का रहेगा।