भारतीय मुसलमानों का भारतीयकरण हो : चांदनी शाह बानो,

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भारतीय मुसलमानों का भारतीयकरण हो : चांदनी शाह बानो,

अवधनामा संवाददाता 

लखनऊ। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की चांदनी शाह बानो ने भारतीय मुसलमानों का भारतीयकरण की मांग की है।उन्होंने कहा कि मुसलमानों का भारतीयकरण से तात्पर्य उस विचार या भाव से है जिसमें भारत से जुड़ने का बोध होता हो या भारतीय तत्वों की झलक हो या जो भारतीय संस्कृति से संबंधित हो। यह भारतीय मुसलमानों का राष्ट्रीयता को व्यक्त करेगा जो भारतीय भूमि, जन, संप्रभुता, भाषा एवं संस्कृति आदि से जोड़ता हो।इसलिए भारतीय मुसलमानों के पास अपना वंशवृक्ष । वंशावली। सिजरा का होना अत्यंत आवश्यक है। सिजरा से कई - कई पीढ़ी का कुल चक्र प्रदर्शित होता है । इसके द्वारा पूर्वजों के परंपरा लक्षणों, व्यवहार क्रियाकलापों से सम्बंधित जमीन अभिलेख जिसे बटवारा पेपर भी कहा जता है । इसकी सहायता से पीढ़ी - दर - पीढ़ी संचरण करने वाले गुणों की तथा भावभिव्यक्ति का पता लगाया जा सकता है ।

भारतीय मुसलमानों का भारतीयकरण से प्रत्येक मुस्लिम के मन में ‘भारतीय’ होने का भाव पैदा होगा वे अपना भला बुरा भारत की उन्नति में देखेंगे। उनकी किसी गतिविधि से भारत का अहित होगा तो वे नहीं करेंगे। भारतीय मुस्लिम की शिक्षा व्यवस्था ऐसी हो कि प्रत्येक शिक्षित मुसलमान अपने आप को भारत का एक अंश, भारत माता का पुत्र माने। ऐसी स्थिति आने पर कोई भी राजनेता जाति,धर्म, पंथ, भाषा, क्षेत्र आदि के नाम पर देश को नहीं बांट सकेगा।

जिससे NRC (नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स) से होने वाले फायदें भारतीय मुसलमानों को भी होगा। यदि अवैध नागरिकों की पहचान कर उनके अपने देशों में वापस भेजे जाते हैं तो यहां संसाधनों के दोहन भार कम होगा। इसके साथ यहां के मूल निवासियों के लिए रोजगार अवसर भी बढ़ेंगे, भूमि खाली होगी जिसका सीधा असर राज्य के सामाजिक, आर्थिक और व्यवसायिक ढ़ांचे पर पड़ेगा।उन्होंने यह भी कहा की

"मुस्लिम महिलाओं की जनसंख्या कम करना" होगा

मुस्लिम बहनों को चौकने की ज़रूरत नहीं है! हां यह हमारी ऐसी जनसंख्या बृद्धि है जिसे कम करने से राजनीतिक पार्टियां को हानि होगा। वह है मुस्लिम महिलाओं की अस्पतालों में अधिक जनसँख्या,पर्दे से घुटन कैदी जैसा व्यवहार,घरेलू हिंसा प्रताड़ना,तीनतलाक़,हलाला,

अशिक्षा आदि में मुस्लिम महिलाओं की असली जनसँख्या कम होनी चाहिए।

इसी प्रकार मुस्लिम पुरुषों की जनसंख्या जेलों से,थानों से, अदालतों से, असंवैधानिक कार्यों से,जाहिलियत से कम करना होगा।यह जनसंख्या अगर नियंत्रण में रहेगी तो रोजगार अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं,नए बच्चे कम पैदा होंगे तो अच्छी शिक्षा भी बच्चों को आसानी से मिल सकेगी।

इसका सीधा असर अल्पसंख्यकवाद एक अभिशाप के रूप में विराजमान मुस्लिम समाज बहुसंख्यक समाज के समानांतर खड़ा हो जाएगा समानता की भावना से अल्पसंख्यकवाद का खात्मा निश्चित है जिसे राजनीतिक पार्टियां अपने हित में हमेशा से अल्पसंख्यक का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका लाभ देश का मुसलमान एक राष्ट्र एक संविधान के तहत मेनधारा से जुड़कर भेदभाव ख़त्म कर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान सुनिश्चित करने लगेगा।