ज़िन्दगी को साकार बनाना है तो क़ुरआन के अनुसार ज़िन्दगी गुज़ारो - मौलाना गुलाम मेहदी "गुलरेज़ "

जिनके अमल सादक़ीन के साथ नज़र नहीं आते हैं वही मुख़ालिफ़े कुरआन कहलाते है

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ज़िन्दगी को साकार बनाना है तो क़ुरआन के अनुसार ज़िन्दगी गुज़ारो - मौलाना गुलाम मेहदी "गुलरेज़ "
अवधनामा संवाददाता

बाराबंकी । जो जवाल से पहले गुस्ले  जुमा करता है ख़ुदा उसे अगले जुमे तक पाक व ताहिर  रखता है ।यही नहीं खुदा उसे आतिश ए जहन्नम से भी बचाता है । जुमा अच्छाइयों की तरफ़ आने और बुराईयों से लौटने का दिन है। नजासत को पेट में जाने से बचाएं ताकि हक़ से आशना हो पाएं, यह बात करबला सिविल लाइन में मजलिस ए तरहीम ब उनवाने चालीसवां बराए ईसाल ए सवाब मरहूमा कनीज़ फ़ातिमा बिन्ते ज़ुर्रियत हुसैन  अहलिया इक़्तेदार हुसैन साहब  को ख़िताब करते हुए आली जनाब मौलाना गुलाम मेहदी "गुलरेज़" साहब ने कही । उन्होंने ये भी कहा कि सेहत व सलामती चाहते हो तो सुबह उठकर सलामे आखिरुज़्ज़मान करो । इमामे ज़माना के बारे में जानना वाजिब है , जो बे जाने मर गया जाहिलियत की मौत मरा । जिनके अमल सादक़ीन के साथ नज़र नहीं आते हैं वही मुख़ालिफ़े कुरआन कहलाते है।परहेज़गार बनो और सादक़ीन के साथ  हो जाओ अपनी आखेरत को बचाओ । ज़िन्दगी को साकार बनाना है तो क़ुरआन के अनुसार ज़िन्दगी गुज़ारो ।आखिर में बीबी फातिमा जहरा के मसायब पेश किए जिसे सुनकर अजादार फफक फफक कर रोने लगे।मजलिस से पहले डा0 रज़ा मौरानवी , इफ़हाम उतरौलवी , नदीम सीतापुरी  ,  नज्म लखनवी , रज़ा  सफीपुरी , बाकर नकवी व अब्बास सल्लमहू ने नज़रानए अक़ीदत पेश किए ।  मजलिस का आग़ाज मौलाना हिलाल अब्बास साहब ने तिलावत ए कलाम ए  पाक से किया । बानिये मजलिस ने सभी का शुक्रिया अदा ।