फाइलेरिया के लक्षणों की न करें अनदेखी। हमीरपुर में घर घर जा कर खिलाई जा रही है फाइलेरिया की दवा

शुरुआती लक्षण दिखते ही शुरू कराएं उपचार। सी ऐम ओ। 

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फाइलेरिया के लक्षणों की न करें अनदेखी। हमीरपुर में घर घर जा कर खिलाई जा रही है फाइलेरिया की दवा। 

अवधनामा संवाददाता (हिफजुर्रहमान)

हमीरपुर : ठंड के साथ  बुखार का आना, त्वचा का काला पड़ जाना या त्वचा में उभार आ जाना और हाथ-पांव, अंडकोष या स्तन के आकार में बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह फाइलेरिया के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। समय रहते उपचार से ही जीवन भर के कष्ट से बचा जा सकता है, क्योंकि एक बार फाइलेरिया ने शरीर में घर कर लिया तो उससे पार पाना मुश्किल हो जाता है।

यमुना-बेतवा जैसी बड़ी नदियों के बीच घिरे जनपद मुख्यालय में जलजमाव की स्थिति सामान्य सी बात है,  लेकिन दूरस्थ इलाकों की स्थिति इससे भिन्न है। पानी के भराव वाले इलाकों में पैदा होने वाले मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से लोग फाइलेरिया की चपेट में आ जाते हैं। बीते कुछ सालों से जनपद में धान की खेती का रकबा भी बढ़ा है, इस वजह से भी धान की खेती वाले इलाकों कुरारा, सुमेरपुर, मौदहा जैसे ब्लाकों में फाइलेरिया ने पांव पसारे हैं। 

 लेकिन नियमित दवा के सेवन से ठीक हो रहे हैं फ्ईलेरिय के मरीज। 

जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) आरके यादव ने बताया कि सुमेरपुर ब्लाक के पचखुरा गांव के 65 वर्षीय किसान, मौदहा ब्लाक के अरतरा गांव की 12 साल की बच्ची, इसी गांव का 51 साल का अधेड़ और मुख्यालय के लक्ष्मीबाई पार्क के 65 वर्षीय बुजुर्ग इन सभी को गुजरे साल फाइलेरिया के शुरुआती लक्षण हुए थे। इन सभी ने समय रहते जांच करवाई, जिसमें इनके फाइलेरिया से ग्रसित होने की पुष्टि हुई। इन चारों लोगों को अलग-अलग पैर में फाइलेरिया की शिकायत थी। सभी का उपचार शुरू हुआ और नियमित दवा (डीईसी और एल्बेंडाजोल) का सेवन करने से अब यह लोग इस रोग मुक्त हैं लेकिन अभी इन्हें दो से लेकर पांच साल तक नियमित दवा खानी होगी ताकि भविष्य में कभी दिक्कत न हो। 

 डीएमओ ने बताया कि जनपद के सुमेरपुर, कुरारा और मौदहा ब्लाक  में फाइलेरिया के 250 से अधिक रोगी हैं। शहरी क्षेत्र में रमेड़ी, रहुनियां धर्मशाला, भिलावां, गौरा देवी नई बस्ती जैसे इलाकों में फाइलेरिया के मरीज हैं। ज्यादातर को हाथीपांव की शिकायत है। इस वर्ष (मई तक) 16539 जांचों में 45 मरीजों में फाइलेरिया की पुष्टि हुई है। मौजूदा समय में जिले में 1186 फाइलेरिया के रोगी हैं। 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ए के रावत ने बताया कि 22 नवम्बर  से शुरू हुए अभियान में कुल 1083 टीमें और 210 सुपरवाइजर लगाए गए हैं। 2166 ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर घर-घर जाकर दो साल से ऊपर के सभी लोगों को दवा खिला रहे हैं। जनमानस अभियान में सहयोग करे। स्वास्थ्य कर्मियों के सामने ही दवा खाएं। दो साल से कम उम्र के बच्चों, गंभीर रूप से बीमार व  गर्भवती को छोड़कर सभी को दवा खानी है। दवा सेवन को आयु के हिसाब से तीन वर्गों में बांटा गया है।फाइलेरिया  मच्छर के काटने से फैलता है, इसलिए बेहतर है कि मच्छरों से बचाव किया जाए। इसके लिए घर व  आस-पास साफ-सफाई रखें। तथा पानी जमा न होने दें और समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव करें। फुल आस्तीन के कपड़े पहनकर रहें।सोते वक्त हाथों और पैरों पर व अन्य खुले भागों पर सरसों या नीम का तेल लगा लें। हाथ या पैर में कही चोट लगी हो या घाव हो तो फिर उसे साफ रखें। साबुन से धुलें  और फिर पानी सुखाकर दवा  लगा लें।