Thursday, February 19, 2026
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क्या आपका कुकिंग ऑयल आपके लिवर को नुकसान पहुंचा रहा है? बार-बार गर्म करने की आदत है खतरनाक

भारतीय रसोई में प्रयुक्त सीड ऑयल्स का ज्यादा या गलत इस्तेमाल लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। इनमें ओमेगा-6 फैटी एसिड ज्यादा मात्रा में होता है और बार-बार गर्म करने से बनने वाले जहरीले तत्व फैटी लिवर का जोखिम बढ़ाते हैं। लिवर की सुरक्षा के लिए तेल का सीमित इस्तेमाल करें, उसे दोबारा गर्म न करें और तले-भुने खाने से बचें।

अक्सर हमारे किचन में सरसों, मूंगफली या सूरजमुखी के तेल का इस्तेमाल तड़के और तलने के लिए किया जाता है। भारतीय घरों में इनके बिना खाना अधूरा सा लगता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रोजाना इस्तेमाल होने वाले ये तेल आपके लिवर की सेहत पर भारी पड़ सकते हैं?

जी हां, हालिया रिसर्च बताते हैं कि इन तेलों का ज्यादा और गलत इस्तेमाल लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। आइए समझें कैसे।

क्या होते हैं सीड ऑयल्स?

सीड ऑयल्स वे तेल हैं जो पौधों के बीजों से निकाले जाते हैं। इनमें मुख्य रूप से सरसों का तेल, सूरजमुखी, मूंगफली और सोयाबीन का तेल शामिल है। इनमें ओमेगा-6 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में होता है। हालांकि, यह शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब हमारे आहार में ओमेगा-3 के मुकाबले ओमेगा-6 की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।

लिवर पर इनका असर

लिवर हमारे शरीर में फैट को मेटाबोलाइज करने और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने का काम करता है। जब हम बहुत ज्यादा रिफाइंड सीड ऑयल या तला-भुना खाना खाते हैं, तो लिवर के सेल्स में फैट जमा होने लगता है। इससे फैटी लिवर डिजीज का खतरा बढ़ता है।

दोबारा गर्म किया हुआ तेल है बड़ा खतरा

अक्सर हम कड़ाही में बचे हुए तेल को बार-बार गरम करके इस्तेमाल करते हैं, जो सबसे ज्यादा हानिकारक है। तेल को बार-बार ज्यादा तापमान पर गर्म करने से उसमें एल्डिहाइड जैसे जहरीले तत्व और ऑक्सीडाइज्ड फैट्स पैदा हो जाते हैं।

अब क्योंकि लिवर शरीर को डिटॉक्स करने का काम करता है, इसलिए इन जहरीले तत्वों का सीधा बुरा असर लिवर की काम करने की क्षमता और उसकी संरचना पर पड़ता है। बाहर मिलने वाले स्ट्रीट फूड और तले हुए स्नैक्स में अक्सर इसी तरह के रीयूज्ड तेल का इस्तेमाल होता है, जो लिवर में सूजन और मेटाबॉलिक गड़बड़ी पैदा कर सकता है।

डाइट में ओमेगा-6 की बढ़ती मात्रा और ओमेगा-3 की कमी के कारण शरीर में सूजन बढ़ सकती है, जो मोटापे, इंसुलिन रेजिस्टेंस और फैटी लिवर जैसी समस्याओं से जुड़ी हुई है।

क्या आपको तेल बदलना चाहिए?

इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप सरसों या मूंगफली का तेल पूरी तरह छोड़ दें, बल्कि कोल्ड-प्रेस्ड तेल का सीमित मात्रा में इस्तेमाल सुरक्षित हो सकता है। असली समस्या तेल की ज्यादा मात्रा, उसे बार-बार गर्म करना और साथ में बहुत ज्यादा रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाला खाना है। इसलिए अपने लिवर को सुरक्षित रखने के लिए तेल के इस्तेमाल में सावधानी बरतें, बाहर के तले-भुने खाने से बचें और दोबारा गर्म किए गए तेल का इस्तेमाल न करें।

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