पाकिस्‍तान के लिए मुसीबत बना तालिबान

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पाकिस्‍तान के लिए मुसीबत बना तालिबान

इस्‍लामाबाद। पाकिस्‍तान का चहेता तालिबान अब उसकी ही जड़ों को खोखला करता दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि आतंकियों का ये संगठन अब पाकिस्‍तान के लिए ही एक बड़ी मुसीबत बनता दिखाई दे रहा है। हालांकि, ये कोई नई बात नहीं है। जिस वक्‍त तालिबान ने अफगानिस्‍तान पर कब्‍जा किया था उसके कुछ ही दिन के बाद उसने अपनी मंशा भी साफ कर दी थी। आपको बता दें कि तालिबान उन निरंकुश आतंकियों का एक संगठन है जिसको किसी की भी रोक-टोक पसंद नहीं है। 

पाकिस्‍तान की मुसीबत को बढ़ाने वाला ताजा वाकया एक दिन पहले का ही है जब अफगानिस्‍तान से लगती पाकिस्‍तान की सीमा पर तालिबान ने पाकिस्‍तान आर्मी के जवानों को न सिर्फ फेंसिंग लगाने से रोक दिया बल्कि ये भी धमकी दे दी कि इस तरह की गलती दोबारा न हो। इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है जिसमें एक तालिबान आतंकी पाकिस्‍तान आर्मी के जवान को धमकाता हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि, रायटर्स ने इस वीडियो की पुष्टि नहीं की है। 

वहीं दूसरी तरफ अफगानिस्‍तान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्‍ता इनायतुल्‍लाह ख्‍वाराज्‍मी ने साफतौर पर कहा है कि तालिबान ने पाकिस्‍तान आर्मी को सीमा पर गलत तरीके से फेंसिंग करने से जबरन रोक दिया। उनके मुताबिक ये घटना पूर्वी नांघर प्रांत की है। तालिबान की तरफ से यहां तक कहा गया है कि उन्‍होंने पाकिस्‍तान आर्मी से उनके औजार तक छीन लिए। पाकिस्‍तान द्वारा अफगानिस्‍तान की सीमा पर की जा रही फेंसिंग को तालिबान ने गैर कानूनी बताया है। बता दें कि पाकिस्‍तान से अफगानिस्‍तान की करीब 2600 किमी लंबी सीमा रेखा मिलती है, जिसपर वो फेंसिंग करना चाहता है। तालिबान पहले भी कई बार इसका विरोध कर चुका है।  

अफगानिस्‍तान के कुनार प्रांत से लगती सीमा पर पाकिस्‍तान आर्मी और तालिबान के बीच गोलीबारी होने की भी खबर है। हालांकि इस बात की कोई पुष्टि नहीं की गई है कि इसके पीछे फेंसिंग एक वजह थी या किसी दूसरी वजह से गोलीबारी हुई है। पाकिस्‍तान के अखबार द डान की खबर में लिखा गया है कि तालिबान और पाकिस्‍तान के बीच बना गतिरोध इस बात का सबूत है कि दोनों के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। फेंसिंग को लेकर तालिबान का रुख ऐसे समय में सामने आया है जब इस्‍लामिक सहयोग संगठन के सम्‍मेलन में हिस्‍सा लेने के लिए कई इस्‍लामिक देशों के नेता इस्‍लामाबाद में मौजूद हैं। इस बार इसमें तालिबान को भी शामिल किया गया है।