पोलैंड पर शरणार्थियों को बेलारूस की ओर वापस धकेलने का आरोप

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पोलैंड पर शरणार्थियों को बेलारूस की ओर वापस धकेलने का आरोप

बेलारूस के नेता अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने इस दावे से इनकार किया कि बेलारूस यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का बदला लेने के लिए सीमा पर प्रवासियों को भेज रहा है.
वीडियो फुटेज में पोलैंड के साथ लगी कँटीले तारों वाली सीमा पर बेलारूस की ओर लोगों की भीड़ दिखाई दे रही है. कुछ लोग बोल्ट कटर और धक्का-मुक्की करके ज़बरन पोलैंड में दाखिल होने की कोशिश करते दिख रहे हैं, जबकि पोलिश गार्ड आँसू गैस का इस्तेमाल कर उन्हें रोकते नज़र आ रहे हैं.
प्रवासियों में से ज़्यादातर युवक हैं, लेकिन इनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं, ज़्यादातर लोग मध्य पूर्व और एशिया से हैं और वे बेलारूस के सीमावर्ती इलाक़े में तंबू में डेरा डाले हुए हैं. इनके एक तरफ़ पोलिश गार्ड और दूसरी तरफ बेलारूस के गार्ड हैं, ये लोग दोनों के बीच फँसे हुए हैं.
सीमा पर सैनिकों से मिलने दौरा करने के बाद मंगलवार को एक आपातकालीन संसदीय सत्र में बोलते हुए, मोराविकी ने कहा, "लुकाशेंको जो हमले कर रहे हैं, उसके मास्टरमाइंड मॉस्को में हैं, मास्टरमाइंड राष्ट्रपति पुतिन हैं."
उन्होंने रूसी और बेलारूसी नेताओं पर प्रवासियों के ज़रिए यूरोपीय संघ को अस्थिर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया, रूस और बेलारूस, दोनों देश यूरोपीय संघ का हिस्सा नहीं हैं.
मोराविकी ने इस स्थिति को 'एक नए तरह का युद्ध कहा, जिसमें लोगों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है'.
उन्होंने बताया कि बीते 30 सालों में पहली बार पोलैंड की सीमा पर इस तरह का 'बुरा हमला' किया गया है. पोलैंड ने सीमा पर अतिरिक्त सेना भेजी है, और 'हथियारों के इस्तेमाल की' चेतावनी दी है. पोलैंड को डर है कि बेलारूस हालात को भड़काने की कोशिश कर सकता है.
यूरोपीय संघ का हिस्सा पोलैंड, लिथुआनिया और लात्विया ने हाल के महीनों में बेलारूस से अवैध रूप से प्रवेश करने की कोशिश कर रहे लोगों की संख्या में इज़ाफ़ा देखा है. मंगलवार को, लिथुआनिया ने बेलारूस के साथ अपनी सीमा पर आपातकाल घोषित कर दिया.
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पोलैंड में सबसे ज़्यादा ऐसे लोग आए है, खासकर कुज़्निका की सीमा पार करने वाले लोगों की संख्या सबसे ज़्यादा है.
पोलैंड पर शरणार्थियों को बेलारूस की ओर वापस धकेलने का आरोप लगाया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के विपरीत है. पत्रकारों और सहायता एजेंसियों के इस क्षेत्र में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
इराक़ के 33 वर्षीय श्वान कुर्द ने वीडियो कॉल के ज़रिए बीबीसी को बताया, "कोई भी हमें बेलारूस या पोलैंड में कहीं भी प्रवेश नहीं करने दे रहा है."
उन्होंने बताया कि कैसे वे नवंबर की शुरुआत में बग़दाद से बेलारूस की राजधानी मिंस्क पहुँचे और अब पोलैंड की काँटेदार तार से लिपटी सीमा से पास एक अस्थायी शिविर में रह रहे हैं.
वह कहते हैं, "बचने का कोई रास्ता नहीं है, पोलैंड हमें अंदर नहीं आने देगा, हर रात वे हेलिकॉप्टर उड़ाते हैं, हमें सोने नहीं देते हैं. हम बहुत भूखे हैं और यहाँ पानी और खाना भी नहीं है. यहाँ हमारे साथ छोटे बच्चे, बूढ़े और महिलाएँ हैं."
यूरोपीय संघ, नेटो और अमेरिका सभी बेलारूस पर प्रवासियों की संख्या बढ़ाने का आरोप लगाते हैं. यूरोपीय आयोग ने लुकाशेंको पर 'अमानवीय, गैंगस्टर-शैली के तहत यूरोपीय संघ में आसान प्रवेश के झूठे वादे के साथ प्रवासियों को लुभाने का आरोप लगाया है.'
उनका कहना है कि बेलारूस की ये कार्रवाई यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के खिलाफ़ एक प्रतिशोध है. ये प्रतिबंध लुकाशेंको के दोबारा चुनाव के बाद, बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद लगाए गए थे. इस चुनाव को व्यापक रूप से अविश्वसनीय माना गया था.
कार्यकर्ताओं का कहना है कि बेलारूस और यूरोपीय संघ के बीच एक राजनीतिक खेल में प्रवासियों को मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है.