कस्बे में फाल्गुन पूर्णिमा के पावन अवसर पर सोमवार की रात होलिका दहन का पर्व पारंपरिक श्रद्धा, विधि-विधान और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। नगर के विभिन्न प्रमुख चौराहों और मैदानों में बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक स्वरूप होलिका की अग्नि प्रज्वलित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।
शुभ मुहूर्त में हुआ पूजन
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को दोपहर से प्रारंभ होकर रात्रि तक विद्यमान रही। ज्योतिषीय विद्वानों के अनुसार, होलिका दहन सदैव ‘भद्रा काल’ को त्यागकर किया जाता है। सौभाग्यवश इस वर्ष भद्रा का प्रभाव दिन में ही समाप्त हो गया था, जिसके कारण 2 मार्च की रात्रि को होलिका दहन के लिए अति शुभ समय प्राप्त हुआ। श्रद्धालुओं ने शुभ मुहूर्त में एकत्रित होकर विधि-विधान से पूजन किया और सुख-समृद्धि की कामना की।
प्रमुख स्थानों पर रही रौनक
नगर के प्रमुख स्थलों जैसे रामलीला मैदान, रागौल और फतेहपुर कुम्हारोड़ा में विशेष आयोजन देखे गए। यहाँ परंपरा के अनुसार गोबर के उपलों और लकड़ियों से बनी होलिका का पूजन किया गया। महिलाओं ने अटूट श्रद्धा के साथ होलिका की परिक्रमा की और पारंपरिक गीतों के बीच पूजा-अर्चना की।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
कार्यक्रम की संवेदनशीलता और भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। शांतिपूर्ण ढंग से आयोजन संपन्न कराने के लिए नगर के सभी प्रमुख संवेदनशील स्थानों पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस की सक्रियता के चलते पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
आज दिखेगा चंद्र ग्रहण का प्रभाव
होलिका दहन के उत्साह के बीच ज्योतिषीय गणनाओं ने एक विशेष खगोलीय घटना की ओर भी संकेत किया है। गणना के अनुसार, 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लग रहा है। यह ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक रहेगा। भारत में चंद्रोदय के बाद ग्रहण का मुख्य दृश्य समय शाम 6:26 बजे से 6:46 बजे तक माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के कारण ग्रहण काल के दौरान पूजा-पाठ और विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।





