अम्बेडकरनगर। होली का मौसम है, रंग तैयार हैं, पिचकारियां सज चुकी हैं… बस अगर कुछ नहीं आया तो वह है वेतन! और बिना वेतन के रंग भी जैसे पूछ रहे हों—“भाई, बजट आया क्या?”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ निर्देश दिया था कि होली से पहले 1 मार्च तक हर हाल में सरकारी, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के खाते में वेतन पहुंच जाना चाहिए। आदेश की स्याही सूखी भी नहीं थी कि टांडा में वेतन की फाइल ने जैसे ‘छुपन-छुपाई’ खेलनी शुरू कर दी। मामला है टांडा नगर पालिका परिषद का, जहां आउटसोर्स कर्मचारियों की आपूर्ति का जिम्मा रेखा सिक्योरिटी कंपनी के पास है।
पालिका ने तो अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए 28 फरवरी को ही कंपनी के खाते में वेतन की पूरी रकम ट्रांसफर कर दी। अब सवाल यह है कि पैसा कर्मचारियों के खातों तक आते-आते किस मोड़ पर ट्रैफिक जाम में फंस गया? 3 मार्च तक सैकड़ों कर्मचारियों के खातों में वेतन नहीं पहुंचा। उधर होली के रंग फीके पड़ने लगे। कर्मचारियों का कहना है कि यह कोई नई कहानी नहीं है—हर महीने वेतन ‘लेट लतीफ’ बनकर आता है।
इस बार तो त्योहार भी साथ ले डूबा। जब अधिकारियों से पूछा गया तो जवाब मिला—“नोटिस जारी करेंगे।” लगता है नोटिस ही इस कहानी का स्थायी पात्र है, जो हर बार मंच पर आता है, संवाद बोलता है और फिर पर्दे के पीछे चला जाता है। ठेकेदार कंपनी के सुरवाइजर का कहना है कि “बैंकिंग त्रुटि” के कारण भुगतान नहीं हो सका। अब बैंकिंग त्रुटि इतनी रंगीन हो गई है कि हर त्योहार पर ही प्रकट होती है!
जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला के निर्णय पर अब सबकी नजरें टिकी हैं। देखना यह है कि इस बार रंग कर्मचारियों के घर तक पहुंचते हैं या फिर वेतन की होली यूं ही ‘ड्राई डे’ बनकर रह जाएगी।
फिलहाल टांडा के आउटसोर्स कर्मचारियों की होली में गुलाल कम और सवाल ज्यादा उड़ रहे हैं—
सरकारी आदेश जीतेगा या ‘बैंकिंग त्रुटि’ फिर बाजी मार ले जाएगी?





