Sunday, August 31, 2025
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हिंदी-मराठी विवाद से देश में गरमाई सियासत, ठाकरे बंधुओं पर भड़के कई दिग्गज; कांग्रेस ने क्यों खुद को रखा दूर?

महाराष्ट्र में हिंदी-मराठी विवाद के चलते उद्धव और राज ठाकरे के साथ आने के बाद हिंदी प्रदेशों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं विवाद को और बढ़ा रही हैं। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ और सांसद पप्पू यादव ने हिंदीभाषियों के साथ मारपीट की घटनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। दुबे ने ठाकरे बंधुओं को चुनौती देते हुए कहा कि वे अन्य भाषा-भाषियों को मारकर दिखाएं।

महाराष्ट्र में हिंदी-मराठी विवाद के चलते उद्धव और राज ठाकरे के साथ आने के बाद हिंदी प्रदेशों के नेताओं की प्रतिक्रिया अब इस विवाद को और बढ़ाने का ही काम कर रही है।

झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे, आजमगढ़ से भाजपा के पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ एवं बिहार के पूर्णिया से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव अपने-अपने बयानों में मराठी न बोल पाने वाले हिंदीभाषियों के साथ मारपीट की घटनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया देते दिखाई दे रहे हैं।

ठाकरे ब्रदर्स पर भड़के निशिकांत दुबे

निशिकांत दुबे ने उद्धव और राज जैसे नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा है कि आपमें हिम्मत है तो जैसे आप हिंदीभाषी को मार रहे हो, वैसे ही उर्दू भाषी को भी मारकर दिखाओ, तमिल और तेलुगू भाषी को भी मारकर दिखाओ।

दुबे के अनुसार, मैंने तो हमेशा कहा है कि अपने घर में हो तो बहुत बड़े बॉस हो, चलो बिहार, चलो उत्तर प्रदेश, चलो तमिलनाडु, तुमको पटक-पटक के मारेंगे। ये गुंडागर्दी नहीं चलेगी।

हम मराठी का सम्मान करते हैं: बीजेपी सांसद

निशिकांत दुबे ने कहा कि हम मराठी का सम्मान करते हैं। मराठी एक आदरणीय भाषा है। महाराष्ट्र के स्वतंत्रता सेनानियों का हमारी स्वतंत्रता में बहुत बड़ा योगदान है। लेकिन आज की वोटबैंक की राजनीति में बीएमसी चुनाव को देखते हुए उद्धव और राज ठाकरे जो कर रहे हैं, उससे ज्यादा घटिया और कोई काम नहीं हो सकता। हम उसका प्रतिकार करते हैं।

पप्पू यादव में भी राज ठाकरे पर साधा निशाना

इसी प्रकार पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने भी शुक्रवार को कहा था कि महाराष्ट्र में हिंदीभाषियों पर राज ठाकरे हमला कर रहे हैं। मैंने राज ठाकरे को चैलेंज किया है कि वह यह गुंडागर्दी बंद करें। वरना मैं मुंबई आकर उनकी सारे हेकड़ी निकाल दूंगा। लेकिन पप्पू यादव अपना यह हमला सिर्फ राज ठाकरे तक सीमित रखना चाहते हैं।

उन्होंने उद्धव ठाकरे को अपनी चेतावनी से अलग करते हुए कहा कि मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में गलती से उद्धव ठाकरे का नाम ले लिया है। मैं उनका सम्मान करता हूं। राज ठाकरे भाजपा के इशारे पर जो गुंडई कर रहे हैं, वह हम नहीं चलने देंगे। हर प्रदेश की क्षेत्रीयता का सम्मान है। लेकिन उसके नाम पर हमारे बिहार के लोगों पर कोई वार करेगा, तो हम उसकी चूलें हिला देंगे। भाजपा के पूर्व सांसद निरहुआ ने भी राज और उद्धव ठाकरे को चुनौती दी थी कि मैं मुंबई में रहता हूँ। हिम्मत है, तो मुझे यहां से निकालकर दिखाओ।

‘किसी की बात पर ध्यान देने की जरूरत नहीं’

निशिकांत दुबे और पप्पू यादव की चुनौती पर राज ठाकरे का तो कोई बयान नहीं आया है। लेकिन उनके बड़े भाई उद्धव ने पत्रकारों द्वारा इस संबंध में पूछे गए प्रश्न पर कहा कि छोड़ो दुबे, बिबे, ऐसा कोई लकड़बग्घा है, जो विवाद कर रहा है। हमारे यहां सब खुश हैं। इनकी बात पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। हमारी महाराष्ट्र की जनता सब जानती है।

उन्होंने कहा कि हम किसी भाषा का विरोध नहीं कर रहे है। देख लो, मैं हिंदी में बात कर रहा हूं। हमारे सांसद भी हिंदी में बात करते हैं। हमारा विरोध हिंदी से नहीं, हिंदी की अनिवार्यता को लेकर है।

कांग्रेस खुद को इस विवाद से रखना चाहती है अलग

महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी की एक घटक कांग्रेस इस विवाद से स्वयं को अलग रखना चाहती है। मुंबई में उसके उत्तर भारतीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अवनीश सिंह कहते हैं कि मुंबई में वर्षों से उत्तरभारतीय समाज रहता आ रहा है, और यहां समरस हो चुका है। किसी भी पार्टी को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस समरसता को बिगाड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

सिंह के अनुसार, केंद्र और राज्य, दोनों जगह भाजपा की ही सरकारें हैं। भाषा के नाम पर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे नेताओं पर सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए।

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