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एक रोज़ा अफ्तार ऐसा भी जहां यतीम और मज़दूर भी थे वीआईपी

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एक रोज़ा अफ्तार ऐसा भी जहां यतीम और मज़दूर भी थे वीआईपी
लखनऊ। इमामबाड़ा सिब्तैनाबाद के मुतवल्ली मोहम्मद हैदर जो पेशे से एक नामी वकील हैं, ने आज एक नई तारीक़ रक़म की, जब उन्होंने शहर की तमाम नामचीन हस्तियों के साथ लालबाग़ में काम करने वाले मज़दूरों और यतीमों को र्वी.आई.पी. बनाया, बक़ायदा इन यतीम बच्चों के लिये बैठने का इंतेज़ाम किया गया और उन्हें बक़ायदा बड़ी इज्ज़त के साथ रोज़ा अफ्तार कराया गया, यह उनका हक़ भी था लेकिन आज हक़ तलफी आम बात हो गयी है लोग रोज़ेदारों को अपने पास फटकने भी नहीं देते और सिफऱ् ग़ैर रोज़ेदारों के साथ रोज़ा अफ्तार का सहारा लेकर सिफऱ् अपने व्यक्तिगत संबध मज़बूत करते हैं। ऐसे में मोहम्मद हैदर नें सिब्तैनाबाद इमामबाड़े में एक आलीशान रोज़ा अफ्तार का इंतेज़ाम किया जिसमें शिया सुन्नी सभी को मदूह किया गया, सभी ने बक़ायदा अपने अपने इमाम के साथ नमाज़ अदा की और हस्बेदस्तूर रोज़ा अ$फ्तार में लखनऊ के मेयर संयुक्त भाटिया, मंत्री बृजेन्द्र पाण्डे, प्रदीप कपूर, रवि भट जैसे लोगों ने अव्वल मोक़ाम हासिल किया। सबसे बाद में बेचारे उन शियों का नम्बर आया जिनके उलेमा एहतियात के नाम पर रोज़ा जितनी देर में खोला जाये उतना ज़्यादा सवाब है का दर्स देते हैं चूंकि एंशा की नमाज़ के बाद कोई और नमाज़ नहीं है इसलिये बस एशां की ही नमाज़ के बाद सभी नमाजिय़ों को रोज़ा खोलने का मौक़ा फराहम हो गया।
तमाम रोज़ा अफ्तारों से कुछ मुक़तलिफ़ इसलिये था कि यहां भी बड़ी बड़ी हस्तियां मौजूद थी लेकिन उनके वजह से रोज़ेदारों को किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। इस रोज़ा अफ्तार की एक ख़ासबात यह भी रही की यहां कोई भी सिलेब्रेटी मोलवी फोटों में नजऱ नहीं आया शायद आज उनके लिये सबसे मसरूफ दिन था क्योंकि आज अखिलेश यादव की तरफ़ से रोज़ा अफ्तार और वह भी ताज होटल में। वाज़ेह रहे जबसे मोहम्मद हैदर ने इमामबाड़ा सिब्तैनाबाद के मुतवल्ली का चार्ज लिया है तब से वह लगातार सिब्तैनाबाद इमामबाड़े को नये अयाम देने में लगे हैं।
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एक रोज़ा अफ्तार सिर्फ रोज़ेदारों के लिये
लखनऊ। शहर में हर कि़स्म के रोज़ा अफ्तार होते रहते हैं कोई रोज़ा अफ्तार दूसरे के माल पर अपने निजी संबंधो को मज़बूत करने के लिये, कोई रोजा अफ्तार अपनी सियासत को चमकाने के लिये कोई रोज़ा अफ्तार अपने ताल्लुक़ात को मज़बूत करने के लिये, लेकिन ऐसो में शहर की एक अहम ख़ातून जिन्हें लोग प्रोफ़ेसर डा. साबरा हबीब के नाम से जानते हैं उन्होंने भी एक रोज़ा अ$फ्तार किया लेकिन उसमें न मंत्री थे न संत्री, उसमें न शहर की नामवर हस्तियां थी न ब्यूरोक्रेट जबकि सालभर उनका इन्हीं के बीच में उठना बैठना है जो उनकी एक आवाज़ पर लब्बैक कहते, लेकिन उन्होंने सिफऱ् रोज़ा अफ्तार किया, रोज़ा अफ्तार और रोज़ा अफ्तार में तरजीह दी रोज़दारों कों वह गऱीब, यतीम, बेसहारा रोज़ेदारों को जिनके बच्चों ने भी रोज़ा अ$फ्तार किया और उनके सरपरस्तों नें भी रोज़ा अफ्तार किया। ज़रूर इनसब के दिलों से प्रो. साबरा हबीब के लिये दुयायें ही देयायें होंगी और शायद अल्लाह को भी ऐसा ही रोज़ा अफ्तार पसन्द हो। दर्स है हम सब के लिये जो सिफऱ् अल्लाह की ख़ुशनूदी के लिये कुछ करना चाहते हैं।
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