Sunday, November 30, 2025
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क्या कभी पानी और तेल को आपस में मिलते देखा है? अंतरिक्ष में इस जगह पर साइंस भी फेल

एक नए शोध के अनुसार, शनि के सबसे बड़े चंद्रमा टाइटन पर अत्यधिक ठंडे वातावरण में तेल और पानी आपस में मिल जाते हैं, जो पृथ्वी पर प्रचलित मान्यता के विपरीत है।यह तथ्य नासा और स्वीडन के चाल्मर्स विश्वविद्यालय द्वारा किए गए इस अध्ययन से पता चला है। टाइटन का औसत तापमान -183 डिग्री सेल्सियस है। यह शोध टाइटन की भूविज्ञान, झीलों और समुद्रों को समझने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

तेल और पानी कभी नहीं मिलता, यह लाइन हम न सिर्फ बचपन से सुनते आए हैं, बल्कि आंखों से भी देखा है। पानी में तेल की बूंदें अलग से तैरती हैं। मगर, टाइटन ने सदियों पुरानी इस मान्यता को गलत साबित कर दिया है। टाइटन से अत्यधिक ठंडे वातावरण में पानी और तेल भी आपस में एक हो गया है।

टाइटन को शनि ग्रह (Saturn) का सबसे बड़ा उपग्रह (Moon) कहा जाता है। इसपर हाल ही में एक स्टडी हुई, जिसने केमिस्ट्री के कई नियमों को परिभाषित कर दिया। अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने स्वीडन के चाल्मर्स प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के साथ मिलकर एक अद्भुत शोध किया है।

शोध ने चौंकाया

साइंस डेली की रिपोर्ट के अनुसार, यह एक ऐसा शोध है, जिसकी मदद से कई चीजों को आसानी से समझा जा सकता है। टाइटन का आकार बुध ग्रह (Mercury) के बराबर है। इस स्टडी के अनुसार, जो चीजें धरती पर मिक्स नहीं होती हैं, वो टाइटन में जाकर आपस में घुल मिल जाती हैं।

चाल्मर्स के रसायन विज्ञान और रासायनिक इंजीनियरिंग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर मार्टिन रहम के अनुसार,

“इस स्टडी की मदद से हमें टाइटन की जियोलॉजी समझने में आसानी होगी। वहां की झीलें और समुद्र भी अलग होंगे।

टाइटन सबसे ठंडे उपग्रहों में शामिल

बता दें कि टाइटन का नाम सबसे ठंडे उपग्रहों की फेहरिस्त में शुमार है। टाइटन का औसत तापमान माइनस 183 डिग्री सेल्सियस रहता है। इस नए शोध की मदद से टाइटन का वातावरण और सर्फेस कंडीशन समझने में मदद मिलेगी।

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