Thursday, February 19, 2026
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भारत सरकार को यथाशीघ्र हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित करना चाहिए:आचार्य सत्येंद्र दास

अवधनामा संवाददाता

हिंदी हमारे दिलों में बसती है,और हिंदी से ही भारत की सभ्यता और संस्कृति सुरक्षित: शरद पाठक बाबा

अयोध्या। मातृभाषा हिंदी को बिना पूर्ण आत्मसात किए राष्ट्र का संपूर्ण विकास असंभव,उक्त उद्गार आज यहां बेनीगंज अयोध्या आई.टी.आई. के सभागार में विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर
हिंदी प्रचार प्रसार सेवा संस्थान के तत्वाधान में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में श्री राम जन्मभूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास महाराज ने कहा कि हिंदी विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली पहली भाषा है जिसमें भारतीय संस्कृति और सभ्यता की पूर्ण झलक दिखलाई पड़ती है, इसकी सुमधुरता से समस्त विश्व आह्लादित होता है,भारत सरकार को यथाशीघ्र हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित करना चाहिए। समारोह का संचालन करते हुए संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ० सम्राट अशोक मौर्य ने समारोह में आए हुए समस्त साहित्य प्रेमियों का आभार प्रकट करते हुए कहा की जब हम अपनी मातृभाषा को अपने देश में सम्मानित करेंगे तभी विश्व की संपर्क भाषा बन सकती है। प्रदेश अध्यक्ष दिनेश कुमार सिंह वत्स ने कहा कि हिंदीभाषा संपूर्ण विश्व की व्यापारिक मजबूरी भी बन गई है। समारोह की अध्यक्षता करते हुए दशरथ गद्दी के यशस्वी महंत बृजमोहन दास जी महाराज ने कहा कि हिंदी के गाने पूरी दुनिया में सुने जाते हैं, तथा रामचरितमानस पूरी दुनिया में पढ़ी जाती है, हिंदी फिल्में पूरी दुनिया में देखी जाती है, इसलिए हिंदी क्रमशः संपूर्ण विश्व की संपर्क भाषा शीघ्र ही बन जाएगी। वरिष्ठ समाजसेवी महापौर पद के भावी प्रत्याशी शरद पाठक “बाबा” ने कहा की हिंदी हमारे दिलों में बसती है,और हिंदी से ही भारत की सभ्यता और संस्कृति सुरक्षित है। समारोह में प्रोजेक्टर के माध्यम से विदेशों में तमाम विदेशियों द्वारा हिंदी सीखने और हिंदी पढ़ाने से संबंधित वीडियो का भी प्रदर्शन हुआ। उक्त अवसर पर लोक धुनों पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए,समारोह में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन प्रमुख रूप से लोगों को आह्लादित करते रहे, जिसमें प्रमुख रुप से रामानंद सागर, सुनीता पाठक, भानु प्रताप सिंह “भयंकर”, सुनील कुमार यादव, दिनेश भट्ट, अमित गुप्ता, आद्दविका भारद्वाज, मनीष मौर्य, जगदीश प्रसाद त्रिपाठी,आदि तमाम साहित्य प्रेमी पत्रकार बुद्धिजीवी कवि, रचनाकार, लेखक, कलाकार समारोह में विशेष रूप से आकर्षण के विषय रहे।

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