Monday, March 2, 2026
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गोरखपुर का रंगपर्व : सीएम योगी के संग बरसेंगे समरसता के रंग

दो मार्च को होलिकादन के दिन भक्त प्रह्लाद और चार मार्च को होलिकोत्सव पर भगवान नृसिंह शोभायात्रा में सम्मिलित होंगे मुख्यमंत्री

दोनों शोभायात्राओं का गोरक्षपीठ से है गहरा नाता, सीएम बनने के बाद व्यस्तताओं के बावजूद बतौर गोरक्षपीठाधीश्वर शामिल होते हैं योगी आदित्यनाथ

गोरखपुर । गोरक्षपीठ की सहभागिता से सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला गोरखपुर का रंगपर्व पूरे देश की नजर में होता है। होलियाना माहौल में महानगर में निकलने वाली दो प्रमुख शोभायात्राएं समरसता का संदेश देते हुए आकर्षण का केंद्र बनती हैं। एक शोभायात्रा होलिकादहन के दिन शाम को और दूसरी होली के दिन सुबह निकाली जाती है। इन दोनों शोभयात्राओं में गोरक्षपीठ का गहरा नाता होने से गोरखपुर का रंगपर्व दशकों से विशिष्ट बना हुआ है। इन शोभायात्राओं में समतामूलक समाज का प्रतिबिंब नजर आता है। बतौर गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री बनने के बाद भी तमाम व्यस्तताओं के बावजूद शोभायात्राओं में शामिल होते हैं। इस साल भी 2 मार्च की शाम को होलिकादहन पर पांडेयहाता से निकलने वाली भक्त प्रह्लाद की शोभायात्रा तथा 4 मार्च की सुबह घंटाघर से निकलने वाली भगवान नृसिंह की रंगभरी शोभायात्रा में सीएम योगी के सम्मिलित होने की उम्मीद है।

बतौर गोरक्षपीठाधीश्वर रंगपर्व के आयोजनों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सहभागिता गोरक्षपीठ के मूल में निहित संदेश के प्रसार का हिस्सा है। रंगों के प्रतीक रूप में उमंग व उल्लास का पर्व होली गोरक्षपीठ के सामाजिक समरसता अभियान का ही एक हिस्सा है। इस पीठ की विशेषताओं में छुआछूत, जातीय भेदभाव और ऊंच नीच की खाई पाटने का जिक्र सतत होता रहा है। समाज मे विभेद से परे लोक कल्याण ही नाथपंथ का मूल है और ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ, ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ द्वारा विस्तारित इस अभियान की पताका वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ फहरा रहे हैं। गोरक्षपीठ की अगुवाई वाला रंगोत्सव सामाजिक संदेश के ध्येय से विशिष्ट है।

सामाजिक समरसता का स्नेह बांटने के लिए ही गोरक्षपीठाधीश्वर दशकों से होलिकोत्सव (भगवान नृसिंह शोभायात्रा) में शामिल होते रहे हैं। 1996 से 12019 तक शोभायात्रा का नेतृत्व करने वाले योगी वर्ष 2020 और 2021 के होलिकोत्सव में लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए इसमें शामिल नहीं हुए थे। सफल कोरोना प्रबंधन का पूरी दुनिया में लोहा मनवाने और इस वैश्विक महामारी को पूरी तरह काबू में करने के बाद सीएम योगी 2022 से पांडेयहाता से निकलने वाले होलिकादहन के दिन भक्त प्रह्लाद की शोभायात्रा और घंटाघर से निकलने वाली भगवान नृसिंह होलिकोत्सव शोभायात्रा में सम्मिलित होने लगे।

नानाजी देशमुख ने की थी रंगोत्सव शोभायात्रा की शुरूआत, गोरक्षपीठ ने दी नई ऊंचाई

गोरखपुर में भगवान नृसिंह रंगोत्सव शोभायात्रा की शुरुआत अपने गोरखपुर प्रवासकाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक नानाजी देशमुख ने 1944 में की थी। गोरखनाथ मंदिर में होलिकादहन की राख से होली मनाने की परंपरा इसके काफी पहले से जारी थी। नानाजी का यह अभियान होली के अवसर पर फूहड़ता दूर करने के लिए था। नानाजी के अनुरोध पर इस शोभायात्रा का गोरक्षपीठ से भी गहरा जुड़ाव हो गया। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के निर्देश पर महंत अवेद्यनाथ शोभायात्रा में पीठ का प्रतिनिधित्व करने लगे और यह गोरक्षपीठ की होली का अभिन्न अंग बन गया।

1996 से योगी आदित्यनाथ ने इसे अपनी अगुवाई में न केवल गोरखपुर बल्कि समूचे पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामाजिक समरसता का विशिष्ट पर्व बना दिया। अब इसकी ख्याति मथुरा-वृंदावन की होली सरीखी है और लोगों को इंतजार रहता है योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाले भगवान नृसिंह शोभायात्रा का। इस शोभायात्रा में पथ नियोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता करते हैं और भगवान नृसिंह के रथ पर सवार होकर गोरक्षपीठाधीश्वर रंगों में सराबोर हो बिना भेदभाव सबसे शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।

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