अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को झटका देते हुए उनके द्वारा लगाए गए टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है। 6-3 के फैसले में कोर्ट ने कहा कि आपातकालीन कानूनों का उपयोग करके बड़े पैमाने पर टैरिफ नहीं लगाए जा सकते।
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए दूसरे देशों पर थोपे गए टैरिफ को अवैध करार दिया है। अदालत ने 6-3 के फैसले में कहा कि इमरजेंसी कानून का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर टैरिफ नहीं लगाया जा सकता।
कोर्ट का यह फैसला तब आया है, जब ट्रंप ने कई देशों पर टैरिफ थोपकर दुनिया में उथल-पुथल मचा दी। कई देशों के साथ तो तनाव बढ़ गया तो कई बड़े व्यापार समझौतों की वजह भी रहा। तो आइए समझते हैं इसकी टाइमलाइन…
‘लिबरेशन डे’ से लेकर ट्रंप के टैरिफ ईयर तक
इसकी शुरुआत तब हुई जब ट्रंप ने इसे लिबरेशन डे कहा। भारत समेत कई देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया, जिसके बाद वैश्विक व्यापार नीति में अनिश्चितता का दौर देखा गया।
अप्रैल 2025 शुरुआती हमला
ट्रंप ने भारतीय सामान पर 26% एक्स्ट्रा ड्यूटी और दुनिया भर में इंपोर्ट पर 10% बेसलाइन टैरिफ का एलान किया। बाजार में उथल-पुथल मच गई। ट्रेडिंग पार्टनर परेशान हो गए।
रोके गए टैरिफ
उतार-चढ़ाव के एक हफ्ते के अंदर 90 दिनों के लिए टैरिफ रोक दिए गए। 10% बेसलाइन बनी रही।
बातचीत और चेतावनी का दौर
23 से 29 अप्रैल के बीच भारत की तरफ से बातचीत करने वाले राजेश अग्रवाल वाशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों से मिले। मई में ट्रंप ने कथित तौर पर Apple को चेतावनी दी थी कि अगर यूएस में बेचे जाने वाले आईफोन विदेश में बने तो उन पर 25% टैरिफ लगेगा।
कोर्ट ने दिया दखल
मई में एक फेडरल अपील कोर्ट ने टैरिफ को कुछ समय के लिए फिर से लागू कर दिया। इससे पहले एक निचली अदालत ने उन्हें रोक दिया था। कानूनी लड़ाई बढ़ गई।
फिर बढ़ोतरी का दौर
2025 के बीच तक, टैरिफ बढ़ाए गए:
- फरवरी में मेक्सिको और ज्यादातर कनाडाई इंपोर्ट पर 25%; चीनी सामान पर 10%। स्टील और एल्युमीनियम को बढ़ाकर 25% किया गया।
- मार्च में इंपोर्टेड कारों और हल्के ट्रकों पर 25%। जून में मेटल ड्यूटी दोगुनी होकर 50% हो गई।
- जुलाई में 69 ट्रेडिंग पार्टनर्स पर 10% से 41% तक के टैरिफ लगे, जिसमें भारत पर 25% और ब्राजील पर 50% शामिल हैं। चीन में टैरिफ 145% तक बढ़ गए थे, जिसके बाद युद्धविराम के बाद उन्हें घटाकर 30% कर दिया गया।
दबाव के बीच डील
आखिरकार भारत ने फरवरी 2026 में एक समझौता किया, जिससे उसके सामान पर यूएस टैरिफ 25% से घटकर लगभग 18% हो गया। जापान और यूरोपियन यूनियन ने 15% टैरिफ व्यवस्था पर बातचीत की। यूके ने कारों पर थोड़ी राहत के साथ 10% बेसलाइन बनाए रखी।
अब सुप्रीम कोर्ट की रोक
6–3 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ को रद कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इमरजेंसी पावर्स बड़े ग्लोबल ट्रेड लेवी को सही नहीं ठहरा सकतीं।





