सिद्धार्थनगर। भगवान के लिए भाव और प्रेम प्रिय है। रामहि केवल प्रेम पिआरा भगवान बड़ी वस्तु को ना देख करके अंतःकरण की श्रद्धा और पवित्रता को देखते हैं और उसे व्यक्ति को अपना सानिध्य प्रदान करते हैं।
उक्त बातें कथा प्रवक्ता राष्ट्रीय युवा व्यास आचार्य शुभम् रामानुज वैष्णवाचार्य जी महाराज श्रीधाम वृंदावन ने कहीं। वह सोमवार की रात जिला मुख्यालय पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रोताओं को कथा का रसपान करा रहे थे। उन्होंने कहा कि कलयुग में सबसे सरल भक्ति भगवान की कथा को सुनना है। जो कोई जीव भगवान की कथा सुनने के लिए बड़े श्रद्धा और प्रेम के साथ आते है ऐसे जीव को भगवान सहर्ष हृदय से लगाते हैं। उन्होंने बताया कि हमारे पूर्वज मनु और सतरूपा है इसलिए हम सभी मनु जी महाराज की संतति होने के कारण मानव कहलाते हैं।
जिसके जीवन में धर्म होता है उसकी त्रैलोक्य में विजय होती है। जिसके जीवन में धर्म नहीं होता है उसकी हमेशा से पराजय होती है। धर्म को जीवन में धारण करने वाला जीव परेशान हो सकता है, परंतु पराजित नहीं हो सकता। इस अवसर पर कथा के आयोजक भीम चंद कसौधन, बार एसोसिएशन अध्यक्ष अखंड प्रताप सिंह, उप्र उद्योग व्यापार संगठन जिलाध्यक्ष अजय कसौधन, हरिराम मिश्रा, ओम प्रकाश, श्रीचंद कसौधन, पूजन आचार्य सतीश वैदिक, अजीत द्विवेदी, देवव्रत मिश्र, संगीत टीम में रोहित श्याम, नीरज राम, प्रभात रंजन आदि शामिल रहे।





