Monday, March 16, 2026
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अनुशासन, संतुलन और आध्यात्मिक दृष्टि ही सफलता की कुंजी : पूर्व डी.जी.पी. विक्रम सिंह

देश-विदेश से आये लगभग 300 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रस्तुत किये शोध-पत्र

वाराणसी। स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज में तेरहवें दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का शुभारम्भ आज शनिवार को विद्यालय प्रांगण में प्रारंभ हुआ। इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का मुख्य विषय “आध्यात्मिकता: वैश्विक कल्याण, सततता और डिजिटल सजगता के लिए एक सिद्ध प्रतिमान” है दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के उदघाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलपति प्रो० अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि आध्यात्मिकता केवल किसी एक परंपरा या धर्म तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह हर मानव के जीवन से जुड़ा एक मूलभूत आयाम है।

उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन युवा पीढ़ी को यह समझाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं कि आध्यात्मिकता केवल अतीत की धरोहर नहीं है, बल्कि इसका आधुनिक विज्ञान और समकालीन समाज से भी गहरा संबंध है। उन्होंने कहा कि,वर्तमान वैश्विक संकटों के दौर में भारत ने जिस प्रकार विकास और संतुलन का मार्ग प्रस्तुत किया है, वह पूरे विश्व के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने खुशी जताई कि स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट साइंसेज वाराणसी, आज आध्यात्मिकता, समावेशिता और प्राचीन ज्ञान को आधुनिक तकनीकी प्रगति से जोड़ने का प्रयास कर रहा है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि प्रो. विक्रम सिंह, कुलाधिपति, नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, नोएडा एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सम्मेलन को संबोधित करते हुए युवाओं से जीवन में अनुशासन, संतुलन और आध्यात्मिक दृष्टि अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से समय के सदुपयोग और लक्ष्य के प्रति निष्ठा को सफलता की कुंजी बताते हुए इच्छाओं को सीमित रखने पर बल दिया।

प्रो. गिरिश्वर मिश्रा, पूर्व कुलपति, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र) ने कहा कि आज की दुनिया तेजी से अस्थिर और अराजक होती जा रही है, ऐसे समय में वैश्विक कल्याण, सतत विकास और डिजिटल सजगता जैसे विषयों पर चर्चा अत्यंत प्रासंगिक है।

प्रो. राजाराम शुक्ल, पूर्व कुलपति, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी ने भारतीय परंपरा की गहराई और उसके आध्यात्मिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान और करुणा के सतत प्रवाह की संस्कृति है। एस.एम.एस. वाराणसी के निदेशक प्रो. पी. एन. झा ने कहा कि संस्थान केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को लेकर भी सदैव सजग और प्रतिबद्ध रहा है।

दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के पहले दिन अलग अलग तकनीकी सत्रों का आयोजन भी हुआ जिसमें देश-विदेश से आये लगभग 300 से अधिक प्रतिभागियों ने शोध-पत्र प्रस्तुत किया । इस अवसर पर एस०एम०एस०, वाराणसी के अधिशासी सचिव डॉ० एम० पी० सिंह, निदेशक प्रो. पी. एन. झा, कुलसचिव श्री संजय गुप्ता, प्रो० संदीप सिंह, प्रो० अविनाश चंद्र सुपकर सहित समस्त अध्यापक और कर्मचारी गण उपस्थित रहे।

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