Thursday, March 5, 2026
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मेरठ में पत्रकारों के कवरेज पर कथित रोक के खिलाफ साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन का विरोध

मेरठ की सीओ ब्रह्मपुरी के कथित ऑडियो मामले में जांच और सार्वजनिक माफी की मांग

फतेहपुर। मेरठ में क्षेत्राधिकारी ब्रह्मपुरी के कथित वायरल ऑडियो को लेकर पत्रकार संगठनों में आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस मामले में साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन (सीजेए) ने उत्तर प्रदेश सरकार को शिकायती पत्र भेजकर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई और सार्वजनिक माफी की मांग की है। एसोसिएशन के उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष शहंशाह आब्दी ने मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में कहा है कि वायरल हो रहे ऑडियो में क्षेत्राधिकारी ब्रह्मपुरी द्वारा अपने अधीनस्थ थाना प्रभारियों को निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है कि यदि किसी थाने के भीतर कोई पत्रकार कवरेज करता हुआ पाया जाए तो संबंधित ड्यूटी इंचार्ज के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

साथ ही यह भी कहा गया कि यदि कोई पत्रकार थाने के अंदर कवरेज का प्रयास करे तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए। सीजेए ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रेस की स्वतंत्रता के खिलाफ बताते हुए कहा कि मीडिया का दायित्व समाज में पारदर्शिता बनाए रखना और पीड़ितों की आवाज को सामने लाना है। थाने ऐसे स्थान हैं जहां आम नागरिक अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं, इसलिए वहां मीडिया की मौजूदगी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने में सहायक होती है। पत्र में यह भी कहा गया है कि बाद में कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा यह सफाई दी गई कि यह टिप्पणी केवल पोर्टल चलाने वालों के लिए थी, प्रिंट मीडिया के लिए नहीं।

इस पर संगठन ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि आज के दौर में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया सभी लोकतंत्र के समान रूप से महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और पुलिस या सरकार को मीडिया को किसी भी श्रेणी में बांटने का अधिकार नहीं है। एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया कि समाचार संकलन के दौरान पत्रकारों द्वारा की जाने वाली वीडियो रिकॉर्डिंग को सामान्यतः आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम 1923 का उल्लंघन नहीं माना जाता है।

न्यायालयों ने भी स्पष्ट किया है कि पुलिस थाना इस अधिनियम की धारा 2(8) के अंतर्गत “निषिद्ध स्थान” की श्रेणी में नहीं आता है। पत्र के माध्यम से सीजेए ने सरकार से मांग की है कि वायरल ऑडियो की निष्पक्ष जांच कराई जाए, यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी पर कार्यवाही किए जाने के साथ ही पत्रकार समाज के प्रति सार्वजनिक माफी मंगाई जाए और भविष्य में पत्रकारों को कवरेज से रोकने या डराने-धमकाने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

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