क्या सीमा पर तैनात एजेंसियां इससे अनजान हैं?
बाल श्रम रोकने के लिए बने कानून सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?
आखिर इन नाबालिगों से काम कराने वालों पर कार्रवाई कब होगी।
शोहरतगढ़ सिद्धार्थनगर।भारत नेपाल सीमा से सटे कोटिया, खुनुवा में इन दिनों बाल श्रम का गंभीर मामला सामने आ रहा है। यहां छोटे-छोटे बच्चे और नाबालिग खुलेआम ‘कैरियर’ बनकर भारत से नेपाल तक सामान ढोते नजर आ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह काम बिना किसी रोक-टोक के रोजमर्रा की तरह चल रहा है, जबकि कानूनन यह अपराध की श्रेणी में आता है।
सीमा से जुड़े बाजारों में सुबह से शाम तक कम उम्र के बच्चे सिर पर बोझ उठाए, कंधों पर बोरे लादे नेपाल की ओर जाते दिख जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक इन बच्चों का इस्तेमाल इसलिए किया जा रहा है क्योंकि इन पर न तो ज्यादा शक किया जाता है और न ही सख्त जांच होती है। यही वजह है कि तस्करी से जुड़े लोग इन्हें आसानी से आगे कर देते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ बच्चे स्कूल जाने की उम्र में मजदूरी करने को मजबूर हैं। गरीबी और लालच के बीच इन मासूमों का भविष्य दांव पर लगाया जा रहा है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि प्रशासन और जिम्मेदार विभागों की निगरानी के बावजूद यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है।
बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह सिर्फ बाल श्रम नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। सीमा क्षेत्र में इस तरह बच्चों से काम कराना उनके शारीरिक और मानसिक विकास दोनों के लिए खतरनाक है।
जरूरत इस बात की है कि प्रशासन इस पर तत्काल संज्ञान ले, सख्त जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे और इन बच्चों को मजदूरी नहीं, शिक्षा की ओर लौटाए। वरना सीमा पर पनपता यह बाल श्रम का जाल आने वाले समय में और भी गंभीर रूप ले सकता है।





