डाक्टरों के पैनल द्वारा किया गया पोस्ट मार्टम, विसरा सुरक्षित
मौदहा हमीरपुर। कस्बे में एक मासूम बच्चे की कथित महिला चिकित्सक द्वारा दवा देने के बाद हालत बिगड़ गई और कुछ देर बाद मासूम बच्चे की मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया जहां पर डाक्टरों के पैनल द्वारा पोस्ट मार्टम करने के बाद विसरा सुरक्षित कर लिया गया है और कथित महिला चिकित्सक को गिरफ्तार कर लिया गया है।जल्द ही विभागीय कार्यवाही किए जाने की बात कही जा रही है।
जबकि सीएसची अधीक्षक, क्षेत्राधिकारी, उपजिलाधिकारी और सहायक मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने भी मौके पर पहुंच कर जांच की और उचित कार्यवाही करने की बात कही।जबकि स्वास्थ्य विभाग की शह पर जगह जगह झोला छाप चिकित्सक और पैथोलॉजी संचालक अपनी दूकान सजाकर जहां आमजन की जेब काट रहे हैं तो वहीं आमजन की जान से भी खिलवाड़ कर रहे हैं।
मंगलवार देरशाम कस्बे के मोहल्ला सिचौली पुरवा निवासी ब्रजेश वर्मा के दो साल के बेटे कार्तिक को सर्दी जुकाम हो गया तो बच्चे के परिजन पडोस में रहने वाली कथित झोला छाप महिला चिकित्सक और अरतरा में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर तैनात उमा सिंह के पास ले गए जहां पर झोला छाप कथित महिला चिकित्सक द्वारा कफ सीरप देने के बाद बच्चे की हालत बिगड़ गई तो परिजन बच्चे को इलाज के लिए कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर गए जहां पर चिकित्सक आशुतोष त्रिपाठी ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया।
बुधवार सुबह परिजनों की सूचना पर क्षेत्राधिकारी राजकुमार पाण्डेय भारी पुलिस के साथ मृतक के घर पहुंचे और शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के भिजवाया। वहीं सीएसचसी अधीक्षक डा. रजत रंजन तिवारी ने भी मौके पहुंच कर जांच की, जबकि घटना की सूचना मिलते ही पहुंचे उपजिलाधिकारी कर्णवीर सिंह ने मामले की जांच की और शव का चिकित्सकों के पैनल द्वारा पोस्ट मार्टम कराने की बात कही। इतना ही नहीं पुलिस ने मासूम बच्चे के पिता ब्रजेश कुमार की तहरीर पर कथित महिला चिकित्सक पर हत्या का मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया हैं। वहीं विभागीय सूत्रों ने बताया कि जल्द ही विभागीय भी की जाएगी।। इतना ही नहीं ड्रग्स इंस्पेक्टर और सहायक मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने मामले की जांच की और परिजनों तथा आरोपी महिला से बातचीत की। मामला स्वास्थ्य विभाग से जुडा होने के कारण स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार मीडिया के कैमरे से बचते नजर आए।
बताते चलें कि, कस्बे सहित क्षेत्र में फर्जी चिकत्सकों द्वारा अपनी दूकानें और पैथोलॉजी सजाईं गई हैं और यह झोला छाप चिकित्सक समय समय पर अपनी दूकान को एक गांव से दूसरे गांव में शिफ्ट करते रहते हैं और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अपनी आंखों में गुलाबी गांधी का चश्मा चढाए वातानूकूलित केबिन से बाहर आने से कतराते हैं। मृतक के पिता मजदूरी करने का काम करते हैं और मृतक अपने परिवार में एक बहिन के बाद एक ही भाई था। घर में हुई इस घटना से परिजनों में कोहराम मच गया है और रो रो कर बुरा हाल है।





