Monday, March 16, 2026
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HomeUttar PradeshLalitpurसंस्कृति और संस्कारों का बीजारोपण करते हैं शिविर

संस्कृति और संस्कारों का बीजारोपण करते हैं शिविर

 

अवधनामा संवाददाता

अटा मंदिर में उमड़ रहे शिविरार्थी
मुनिश्री सुधासागर की प्रेरणा से जारी हैं दस दिवसीय श्रमण संस्कृति शिविर
संयोजन टीम ने अटा जैन मंदिर शिविर का लिया जायजा
 
ललितपुर। श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर द्वारा श्रमण संस्कृति गौरव रजत महोत्सव के अन्तर्गत शिरोमणि आचार्य श्रीविद्यासागरजी महाराज के आशीर्वाद एवं निर्यापक मुनिपुंगव श्रीसुधा सागरजी महाराज की पावन प्रेरणा से ललितपुर में अनेक स्थानों पर दस दिवसीय श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर चल रहे हैं जिसमें हजारों  शिविरार्थी सम्मिलित होकर लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इस अवसर पर शिविर प्रभारी आलोक मोदी ने श्रमण संस्कृति संस्थान साँगानेर व मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज के अवदान को रेखांकित किया। ललितपुर को भी संस्थान ने अनेक विद्वान दिए हैं। शिविर प्रभारी मुकेश शास्त्री ने कहा कि ललितपुर में शिविरों में प्रत्येक शिविर स्थान पर सभी आयु वर्ग के लोग बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। डा.सुनील संचय ने बताया कि वर्तमान में नैतिक शिक्षा के अभाव के चलते वर्तमान का युवा वर्ग अपने संस्कारों से च्युत होते जा रहा है। इन शिविरों के माध्यम से पाश्चात्य की ओर बढ़ रही युवा पीढ़ी को नैतिक, धर्म, संस्कृति की शिक्षा देकर उन्हें संस्कारित करना उद्देश्य है। इन शिविरों के माध्यम से जहॉ बच्चे संस्कारित होंगे वहीं उनके अभिभावक भी संस्कारित होंगे। अटा जैन मंदिर में चल रहे शिविर में पंडित सतीश शास्त्री व विकास शास्त्री ललितपुर द्वारा छहढाला एवं तत्त्वार्थ सूत्र, आलोक मोदी द्वारा आलाप पद्धति, पंडित प्रियांशू जैन द्वारा रत्नकरण्ड श्रावकाचार, इष्टोपदेश, पंडित नयन कुलवा, पंडित विकास रहली, पंडित आर्यन ललितपुर, पंडित नयन अहमदाबाद द्वारा बालबोध भाग एक व दो की कक्षाएं सुबह एवं शाम संचालित की जा रही हैं। जिसमें लगभग सात सौ शिविरार्थी उत्साह से सम्मिलित हो रहे हैं। विद्वानों द्वारा बड़े ही रोचक व सरल तरीके से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सतीश शास्त्री ने तत्त्वार्थ सूत्र की कक्षा में  बताया कि तत्वार्थ सूत्र जैन साहित्य में संस्कृत का प्रथम सूत्र ग्रंथ है।इसे जैनदर्शन में तत्वार्थसूत्र को बाईबिल, वेद की तरह स्थान प्राप्त है।
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