गोरखपुर। बच्चों के बीच लोकप्रिय पैकेट वाले स्नैक्स चिप्स, नमकीन वगैरा की बाज़ार में भारी मांग है। बेहिसाब मुनाफे के चलते बाज़ार में सैकड़ों कम्पनियां है जो पैकेट वाले स्नैक्स चिप्स व नमकीन आदि बनाती हैं। इनकी डिमांड इस कदर तेज़ है कि आम तौर पर कोई खरीददार चिप्स और स्नैक्स के पैकेट पर ‘बेस्ट बिफोर’ या एक्सपायरी डेट पर ध्यान ही नही देते।
ऐसा ही एक मामला जिले के महराजगंज बॉर्डर के इलाके में पकड़ में आया है जहां एक कम्पनी के रैपर पर न एक्सपायरी डेट है और न ही बेस्ट बिफोर अवधि अंकित है। एक्सपायरी डेट न होने की वजह से ऐसे प्रोडक्ट ज़्यादा दिन तक बाजार में पड़े रहते हैं और कम्पनी को वापसी लेने की ज़रूरत भी नही पड़ती क्योंकि ये माल कभी खराब ही नही होते।
जबकि कम्पनी बच्चों के स्वास्थ से खिलवाड़ करने की कीमत पर लाखों का मुनाफा काट रही है। जबकि चिप्स और स्नैक्स के पैकेट पर एक्सपायरी डेट न होना एक गंभीर कानूनी और स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है, क्योंकि FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) नियमों के अनुसार हर पैक खाद्य पदार्थ पर पैकेजिंग की तारीख और बेस्ट बिफोर अवधि अंकित होना अनिवार्य है।
बिना एक्सपायरी डेट वाले उत्पाद बासी हो सकते हैं, जिससे लीवर, हृदय, और पाचन संबंधी समस्याएं (पिंपल्स, हार्मोनल इम्बैलेंस) हो सकती हैं। खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत निर्माता को सामग्री, तारीख और स्थान की जानकारी देना अनिवार्य है। ऐसी जानकारी न होना नियमों का उल्लंघन है।





