जिला विकास एंव संरक्षण समिति के मंच पर बुंदेली कलाकारों ने दर्शकों का दिल जीत लिया
उत्तर भारत के मशहूर ऐतिहासिक कजली महोत्सव में इस साल जिलाधिकारी गजल भारद्वाज के विशेष रुचि लेने से महोत्सव की रंगत ही बदल गई है। एक से एक नामी गिरामी कलाकार, सिंगर, कवियों के अलावा राष्ट्रीय स्तर के कलाकार आल्हा ऊदल की धरती में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे है। इतना ही नही जिलाधिकारी स्वयं देर रात तक कजली महोत्सव के कार्यक्रमों में समय दे रही है। जिससे अधिकारी भी रात मे डटे रहते है। यही वजह है कि जिला विकास एंव संरक्षण समिति के तत्वावधान में होने वाले गीत संगीत के कार्यक्रम एक अलग छाप छोड़ रहे है। कजली महोत्सव की चौथी शाम सुंदर गीत और भजन गायिका मैथिली ठाकुर के नाम रही।
मंच पर मैथिली ठाकुर के आते ही दर्शकों ने उनका जोरदार तालियों के साथ स्वागत किया। इसके बाद मैथिली ठाकुर ने हरे रामा रिमझिम बरसे पनिया, झूले राजा रानियां जाके भरे पानियां। गीत से शुरूआत की। इसके बाद मैथिली ठाकुर द्वारा हो लाल मेरी पट रखियो बल झूले लालन, लाल मेरी पट रखियो बल झूले लालन सिन्ध्ड़ी दा सेहवन दा सखी शाबाज़ कलंदर दमा दम मस्त कलंदर, अली दा पहला नंबर दमा दम मस्त कलंदर, सखी शाबाज़ कलंदर। कव्वाली गाकर दर्शकों का दिल जीत लिया। इस कव्वाली पर दर्शकों की खूब वाह वाही लूटी। गीत संगीत का कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा, जिसका दर्शकों ने आनंद लिया। अंत में जिलाधिकारी ने भजन गायिका को स्मृति चिंह देकर सम्मानित किया।
इसी मंच पर महोबा के युवा आल्हा गायकों द्वारा नए अंदाज में आल्हा गायन की प्रस्तुति देकर लोगों का खूब मनोरंजन कराया। इतना ही नही मंच स्थल पर तमाम दूर दराज से आए लोगों को जगह न मिल पाने के कारण ग्रामीणों ने मंच स्थल के बाहर बैठकर आल्हा गायन का लुत्फ उठाया। आल्हा गायकों ने आल्हा गायन की पंक्तियां सुनाई, बारह बरस लै कूकर जीवै, अरु तेरह लै जियै सियार। बरस अठारह क्षत्री जीवै, आगे जीवै को धिक्कार सुनाकर बुंदेलियों में जोश भर दिया। आल्हा गायन के दौरान ग्रामीण खूब उछलते दिखाई दिए।





